अपनी मेहनत के दम पर एक बार नहीं बल्कि 3 बार क्लियर करें यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा………..

भारत देश में किस प्रकार से स्त्री आगे बढ़ रही हैं यह बात तो कुछ पता ही होगी आज का ऐसा भी कोई क्षेत्र नहीं है जहां पर महिलाएं पुरुष से कम हो बल्कि आम यू कह सकते हैं कि महिलाएं पुरुष से एक हाथ एक हाथ आगे ही हैं और हर जगह पर चढ़कर अपनी भागीदारी पेश कर रही है और अपनी जरूरत का एहसास दिला रही है ऐसी कई स्त्रियां है जो आजकल अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम और प्रयास करती हैं और उन्हें उसकी सफलता मिलती है आज उन्हीं में से एक स्त्री की कहानियां हम आप सभी लोगों को सुनाने वाले हैं। आज हम आप सभी लोगों को पूनम दलाल की कहानी सुनाने वाले हैं जिन्होंने यूपीएससी की परीक्षा को एक बार नहीं बल्कि 3 बार बात किया है जो कि एक असंभव कार्य सा दिखता है पुणे कि हक्कानी सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का जरिया हो सकती है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में इस प्रकार की कठिनाइयों से लड़कर भी अपनी मंजिल को हासिल करा है।

हरियाणा के झज्जर जिले में आने वाली पूनम दलाल दहिया महज 21 वर्ष की उम्र में ही सरकारी विद्यालय में शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली अपनी काबिलियत के दम पर इसी दौरान बैंक की परीक्षा दी हुई है उन्हें सफलता प्राप्त हुई और वहां इसी प्रकार से अपने जीवन में आगे बढ़ती चली गई और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा बैंक की नौकरी करते हुए कर्मचारी चयन आयोग यहां उन्होंने सफलता पाते हुए ऑल इंडिया में 7 वी रैंक हासिल करें और उन्होंने तय किया कि वह यूपीएससी की परीक्षा देंगे और 28 वर्ष की उम्र में पूनम ने अपने पहले प्रयास में ही यूपीएससी की परीक्षा में सफलता पाई और अपनी मनपसंद रैंक ना आने की वजह से उन्होंने अपनी तैयारी को आगे जारी रखना चाहा।

दूसरे पर्यास में भी उन्हें अपनी मनपसंद सर्विस नहीं मिली इसीलिए उन्होंने एक बार और प्रयास करने का निर्णय लिया अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी मंजिल को हासिल करें और अपनी मनपसंद सर्विस लेने के बाद अपने सपने को साकार किया और इसी के साथ-साथ अपने माता-पिता का नाम भी पूरे गांव में और पूरे भारत देश में गर्व से ऊंचा कर दिया।

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