एक मगरमच्छ के हुआ “मंदिर के पुजारी” को प्यार, एक आवाज देते ही बाहर आ जाता है मगरमच्छ तलाब से

लगभग हर एक मनुष्य को किसी न किसी पालतू जानवरों से प्यार और उनके साथ अलग तरह की दोस्ती तो अवश्य ही देखी जाती है। इस प्रकार के किस्से भी आपने कई बार सुने होंगे लेकिन क्या यही दोस्ती किसी जंगली जानवर के साथ हो तो या थोड़ी अलग बात है। वह भी किसी जंगली जानवर के साथ ऐसा आपने पहले कभी नहीं सुना होगा लेकिन आज इस आर्टिकल में हम आपको एक ऐसी ही कहानी के बारे में बताने वाले हैं।

मंदिर के पुजारी को हुआ मगरमच्छों से प्यार

यह कहानी है छत्तीसगढ़ के कोटा में सुनकर में “सीताराम दास” नामक एक पुजारी की ,जो पिछले कई समय से मंदिर में पूजा-पाठ करते आ रहे हैं. मंदिर में उन्हें यहां के एक तालाब में रहने वाले मगरमच्छों से बेहद प्यार है। सीताराम दास मगरमच्छो को अपने बच्चों जैसा मानते हैं। देखने में तो यह मगरमच्छ काफी बड़े और खतरनाक से लगते हैं और काफी लोग तो इनसे डरते भी हैं खासकर उनके खतरनाक जबड़े को देखकर लोगों को उनसे काफी डर लगता है।

ज्यादातर इस प्रकार के जानवरों को लोग चिड़ियाघर में दूर से देखना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें पास जाने में उन्हें काफी डर और खतरा महसूस होता है। इन जंगली जानवरों से मोहब्बत करना भी बेहद ली अलग ही और असमंजस वाली बात है। लेकिन यहां उनकी सेवा और प्यारी ही है की वह उनकी देखभाल भी करते हैं।

तलाब के सभी मगरमच्छ पंडित जी की एक आवाज सुनते हैं और उनके इशारे पर बाहर आ जाते हैं। उनके सभी शहरों को मगरमछ अच्छे तरीके से समझते हैं। जब भी पंडित जी मगरमच्छो को आवाज लगाते हैं तो वह तुरंत झट से तलाक के बाहर आ जाते हैं। कई बार पंडित जी उन्हें खाना भी देते हैं और उनकी देखभाल भी करते हैं खाली समय में।

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