कभी मांजने पढ़ते थे लोगों के घर बर्तन, लेकिन अपने संघर्ष और कोशिश के कारण आज बन चुकी हैं आईपीएस अफसर

कोई भी व्यक्ति जब अपने जीवन में किसी चीज को हासिल करने की कोशिश करता है और उसको अपना लक्ष्य बना लेता है तो एक न एक दिन उसे उस मुकाम तक पहुंचना जरूरी हो जाता है कुछ इसी प्रकार की कहानी आज हम आप सभी लोगों को सुनाने वाले हैं जो लड़की अभी गांव में एक वक्त के खाने को तरसती थी आज उसने कुछ ऐसा कर दिखाया है कि वह लाखों करोड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं उन्होंने अपने जज्बे और लग्न की कुछ ऐसी मिसाल पेश करी है कि लोग दंग रह चुके हैं। एक छोटे से गांव कुंदरकी की रहने वाली इलमा अफरोज ने बचपन से ही जो ख्वाब देखा था उसको हासिल कर लोगों को यह दिखा दिया है कि ख्वाब छोटे या बड़े होने से कोई फर्क नहीं पड़ता फर्क तब पड़ता है जब आप उसके लिए मेहनत करते हैं इलमा अफरोज की गरीबी के दिनों में देख कर कोई भी या अंदाजा नहीं लगा सकता था कि आज वह इतने बड़े मुकाम तक पहुंच पाएंगे।

केवल 14 वर्ष की उम्र में ही हो गया था पिता का निधन

इलमा जब केवल 14 वर्ष की थी तब किसी कारणवश उनके पिता की मृत्यु हो गई थी इतनी कम उम्र में पिता की मृत्यु की वजह से उनके ऊपर घर की जिम्मेदारियों का भार बहुत ज्यादा बढ़ चुका था जिस समय इलमा के पिता की मृत्यु हुई उस समय उनका एक छोटा भाई था। जो केवल 2 साल का था घर में आई मुसीबतों ने इनमार्को और उनकी मां को संशय में डाल दिया फिल्मों ने एक साक्षात्कार में भी बताया है कि किस तरीके से उनके परिवार को सुधार रिश्तेदार ने उनकी मां को लड़की की पढ़ाई में पैसे ना बर्बाद करने की सलाह दी थी और उन्हें आगे बढ़ने से रोका था लेकिन उनकी मां ने समाज की परवाह करे बगैर अपनी बेटी को आगे बढ़ाया और लगातार मेहनत मजदूरी कर अपनी बेटी के ऊपर कैसा लगा दी गई। उन्होंने अपने जीवन में सब कुछ छोड़ कर केवल और केवल यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी सन 2017 में उन्हें 270 भी रैंक हासिल करें जिस वक्त उनकी उम्र केवल 26 वर्ष थी और उन्होंने आईपीएस चुना इसके बाद उन्होंने अपने दिए गए इंटरव्यू में कहा कि उनका यही सपना था कि वह किसी न किसी प्रकार से अपने देश की सेवा करें और अपने जीवन को साकार बनाए।

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