कभी स्कूल से निकाले गए थे आकाश, लेकीन आज हैं IPS अधिकारी, जानें उनकी सफलता का राज !

UPSC सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा मानी जाती है। यह टेस्ट बेहद कठिन होता है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं। यह देखा गया है कि जो छात्र बचपन से ही पढ़ाई में होशियार होते हैं, वे इस परीक्षा को पास करने में सफल हो जाते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि जो स्कूल में कमजोर थे, वे इसे क्रैक नहीं कर सकते

 

यूपीएससी की परीक्षा को कोई भी कड़ी मेहनत और लगन से पास कर सकता है। स्कूल में कम अंक मिलने पर भी आप कड़ी मेहनत कर सकते हैं और बाद में इस परीक्षा में सफल हो सकते हैं।

 

आज हम आपको एक दिलचस्प कहानी बताने जा रहे हैं जिसे एक बार जान लेने के बाद आप कम नंबरों से कभी नहीं डरेंगे। इतना ही नहीं अपनी मेहनत और लगन से आपको कुछ करने की प्रेरणा मिलेगी। यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसे कम अंक के कारण स्कूल से निकाल दिया गया था, लेकिन वह अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण के कारण एक आईपीएस अधिकारी के रूप में उभरा। यह कहानी है कानपुर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आकाश कुल्हारी की।

 

हार मानने की प्रवृत्ति ने मुझे शिखर पर पहुंचा दिया

 

आकाश कुल्हारी ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं भी कुछ ऐसा ही था। 10वीं का रिजल्ट आने के बाद मुझे स्कूल से निकाल दिया गया। लेकिन फिर मेरा आत्मविश्वास जागा और मैं आज कड़ी मेहनत के दम पर यहां पहुंचा हूं। हां, इतना कि कभी हार न मानने की प्रवृत्ति मुझे शिखर पर ले गई

 

आईपीएस आकाश कुल्हारी राजस्थान के बीकानेर जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता पशु चिकित्सक थे। उनकी स्कूली शिक्षा बीकानेर शहर के सीबीएसई बोर्ड के बीकानेर स्कूल से शुरू हुई। 1996 में उन्होंने हाई स्कूल केवल 57 प्रतिशत अंकों के साथ पास किया। पहले राउंड में ही कमजोर और कम अंक लाने के कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था।

 

इसके बाद बड़ी मुश्किल से परिजनों को केंद्रीय विद्यालय बीकानेर में प्रवेश मिला। इस बार आकाश ने कड़ी मेहनत की और इंटरमीडिएट की परीक्षा 85 प्रतिशत के साथ पास की। उन्होंने 2001 में दुग्गल कॉलेज, बीकानेर से इसका विस्तार किया। यहीं से उन्होंने बीकॉम किया। इसके बाद आकाश ने जेएनयू दिल्ली से स्कूल ऑफ सोशल साइंस से एम.कॉम किया।

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