“गरीबी और बीमारियों “से लड़ते हुए अपने पहले प्रयास में ही “उम्मुल खेर” बनी IAS ऑफिसर……….

आईएएस की परीक्षा एक ऐसी परीक्षा है जिसे उत्तीर्ण करने के लिए लोग सालों से प्रयास करते रहते हैं। लोगों का सपना होता है कि वह किसी भी प्रकार से एक बार इस प्रकार की परीक्षा में सफल हो जाए तो उनका जीवन सफल हो जाएगा। लेकिन यह सपना देखना तो बेहद ही आसान होता है। इसे पूरा करते हुए तो मानो सालों लग जाते हैं और किसी किसी का सपना तो पूरा भी नहीं हो पाता है। लगभग देश का हर एक दूसरा नौजवान इस परीक्षा पास करना चाहता है। लेकिन सपने पूरे होते हैं जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करता है यूपीएससी की परीक्षा में सफलता मिलने की खुशी अलग ही होती है। लेकिन यह बात भी सच है आज के इस पोस्ट में हम आपको ऐसे ही आईएएस अफसर के बारे में बताने वाले हैं जिन्होंने अपने जीवन में अनेको कठिनीएओ को झेला , ताकि वह किसी भी तरीके से आईएएस अधिकारी बन सके और अपने जीवन के लक्ष्य को पा सकें।

लेकिन जब वह बचपन में छोटे थे तो उनके पिताजी पूरे परिवार सहित दिल्ली में निजामुद्दीन क्षेत्र में एक छोटी सी झुग्गी झोपड़ी में रहने के लिए आ गए थे और उन्हें जीवन उसी झुग्गी झोपड़ी में व्यतीत किया। जहां पर में जीवन जीने की एक अच्छी सीख मिली। उन्हें बचपन में अनेकों प्रकार की बीमारियों से जूझना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी अपने जीवन में हार नहीं मानी और अपनी हर एक मुसीबत को अपने आगे का नया रास्ता बनाती हुई और अपने जीवन में आगे बढ़ती रही। उम्मुल खेर को “बोन फ्रैजाइल डिसऑर्डर” से जूझना पड़ा, जिससे इंसान की हड्डियां काफी ही कमजोर हो जाती हैं। इस बीमारी के बाद किसी भी व्यक्ति की हड्डियां अपने आप कमजोर होने शुरू हो जाती है और धीरे-धीरे करके टूटने लगती हैं इस खतरनाक बीमारी के कारण ने अपने जीवन में अनेकों प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा उन्हें लगभग 16 फेक्चर और आठ सर्जरी से होकर गुजरना पड़ा।

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