देवर ने लिए “भाभी के साथ” सात फेरे, असलियत जान कर लोगों की आंखों से अये आंसू

हमारे भारत की संस्कृति में ज्यादातर ऐसा देखा गया है कि हिंदू रीति रिवाज के हिसाब से पुनर्विवाह का रिवाज नहीं है और ऐसे कैसे पौराणिक काल में भी नहीं देखा गया था और इस बात को अभी भी कुछ गांव ऐसे हैं जहां पर पूर्ण शक्ति से लागू किया जाता है और लोगों को पुनर्विवाह जैसे रीति-रिवाजों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है और वह ऐसे कार्य को करने से सख्त मना करते हैं और इसकी बिल्कुल ही निंदा करते हैं।

लेकिन आज हम आप लोगों को एक ऐसी खबर सुनाने वाले हैं। जहां पर क्षत्रिय महासभा ने इस पुरानी मान्यता की अनदेखी कर नारी को समाज में जगह दी और उसके हित के हिसाब से फैसला लिया मैरिज हॉल में जब विधवा बंदना सिंह ने अपने ही देवर शुभम सिंह और मनीष के साथ मेरे लिए तो सभी लोगों के दिल पसीज गया और लोगों की आंखें नम हो गई क्योंकि वह आसमा ही कुछ इस प्रकार का बन गया था।

विधवा हो गई थी वंदना अपने जीवन में

उनकी कहानी पूरे बुंदेलखंड में जानी जा रही है और लोग उन्हीं के बारे में बात कर रहे हैं ,क्योंकि यह एक ऐसी खबर है और इसके बारे में बताया जा रहा है कि, वंदना सिंह फिर से विधवा हो गई हैं। शनिवार को अपने देवर के साथ सात फेरे लेने से पहले उसने कहा कि उसके पति की मौत ने उसे शादी के कुछ महीने बाद ही निराश किया है. लेकिन सास समेत ससुराल के सभी सदस्य उसके संकटमोचक साबित हुए।

जब उसने अपने देवर के साथ सात फेरे लिए तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। वंदना ने अपनी सास की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें वहां का माहौल अपनी मां से ज्यादा पसंद था. खुशी जाहिर की कि उसे फिर से ससुराल जैसा ही परिवार मिला है। वंदना ने कम उम्र में विधवा हो गई युवतियों को साहसी बनने और परिवार के सहयोग से एक नया जीवन शुरू करने को कहा।

परिवार वालों ने इस कदम की करी तारीख

शुभम सिंह ने दरियाबाद पूरे विस्तार से बताइए तो पता चल रहा है कि उन्होंने बताया कि वंदना ने ससुराल में सबसे साथ मिलकर इतना अच्छा व्यवहार बना रखा था। कि पूरे लोग उनके सम्मानजनक और व्यवहारिक रवैया से काफी ज्यादा खुश थे और उनके बड़े भाई के देहांत से ही उनके जीवन में मायूसी छा गई थी और उन्हें उनकी भाभी का ऐसा हाल देखे नहीं गए जिस को मद्देनजर रखते हुए उन्होंने ऐसे कदम उठाए और उनके परिवार वालों ने उनके काफी दादा सराहना कर इस विषय में।

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