पति ने जीवन में साथ छोड़ा ,तो अपनी मेहनत से शुरू किया फूड ट्रक का बिजनेस ,10 हजार प्रतिदिन आमदनी ………

यह बात तो सभी लोगों को पता होगी कि एक शादीशुदा लड़की की जिंदगी में पति क्या मायने रखता है लेकिन कभी-कभी किसी व्यक्ति या महिला के जीवन में कुछ ऐसे मोड़ आ जाते हैं जिसके बाद से उन्हें उबर पाना बेहद मुश्किल होता है कभी-कभी कोई कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को अकेला छोड़ देता है और उसके बाद एक लड़की का सफल भी रही मुश्किल होता है क्योंकि समाज में उसे अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता है या फिर आप कह सकते हैं कि पारिवारिक दबाव होने के कारण वह आगे बढ़ने से कतराती है लेकिन आज आप सभी लोगों को ऐसी लड़की की कहानी सुनाने वाले हैं जिन्होंने उस घटना के बाद अपने आप को इस कदर तैयार करा कि अपनी मेहनत और मशक्कत करने में एक फूड ट्रक का बिजनेस की शुरुआत करें और धीरे-धीरे करके भाभी ने भी इतना बड़ा कर लिया कि उनकी रोजाना की आमदनी करीब 10,000 होने लगी और आज वह लाखों महिलाओं के लिए इंस्पिरेशन बन चुकी है।

जब उनके पति कभी वापस नहीं आए

शिल्पा अपनी इस बेबसी को ठीक ढंग से बता भी नहीं पाती हैं। अपने संघर्षों को बयाँ करते हुए शिल्पा कभी बहुत ज़्यादा भावुक हो जाती हैं, तो कभी उनके चेहरे पर एक आत्मविश्वास वाली मुस्कुराहट भी आ जाती है तो कभी ऐसा भी होता है कि जब वह बिल्कुल ही ख़ामोश हो जाती हैं।

“बात 2005 की है जब शिल्पा शादी के बाद अपने पति के साथ मैंगलोर (Mangalore) में रह रही थी। सब कुछ ठीक-ठाक था चल रहा था। लेकिन 2008 में एक दिन शिल्पा के पति ने कहा कि उन्हें बिजनेस के लिए लोन के सिलसिले दो-चार दिनों के लिए बेंगलुरु जाना है”। यहीं से उनकी लाइफ में यू-टर्न आया, जब उनके पति कभी वापस नहीं आए। जब उनके पति उन्हें छोड़ कर गए तब शिल्पा के पास उनका एक 3 साल का बेटा था। इस तरह अचानक से शिल्पा के ऊपर सारी जिम्मेदारी आ गई थी।

उन्हें बिल्कुल पता नहीं था कि उनका यह बिजनेस चलेगा या नहीं

शिल्पा के मन में फूड ट्रक बिजनेस शुरू करने का विचार आया तब उन्हें बिल्कुल पता नहीं था कि उनका यह बिजनेस चलेगा या नहीं। शिल्पा ने बताया कि जब उनका पति उन्हें छोड़ कर गया तब शिल्पा के बैंक अकाउंट में सिर्फ़ 1 लाख रुपए थे, जिसे शिल्पा ने हीं थोड़ी-थोड़ी करके इकट्ठा की थी। शिल्पा ने आगे बताया कि “वो सिर्फ़ 1 लाख रुपये थे उसके अलावा मेरे पास और कुछ नहीं था, इतने रुपए में ना मैं कोई दुकान खरीद सकती थी, न ही ज़्यादा दिन किराये पर दुकान चला सकती थी। मेरे घर के ठीक सामने महिंद्रा का शोरूम था, अचानक एक दिन मेरे मन में ख़्याल आया कि क्यों ना मैं फाइनेंस पर एक ट्रक ले लूं और उसे ही चेंज करा कर फूड ट्रक का बिजनेस शुरू करूं।”

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