पिता करते थे एक मामूली सी “गार्ड की नौकरी”, लेकिन बेटे नहीं “आईएएस अधिकारी” बन दिलाया मान-सम्मान ……

कई बार आपके जीवन में कुछ घटनाएं ऐसी हो जाती है जो कि आपको इस कदर प्रेरित कर देते हैं कि आपको जब तक सफलता नहीं मिल जाती आप उसके पीछे भागते रहते हैं कुछ ऐसा ही हुआ कुलदीप के साथ जिंदगी पिता के साथ जब बदतमीजी करेगी तो उन्हें बहुत बुरा लगा था कि उनके पिताजी एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे जिसकी वजह से लोगों का सम्मान नहीं किया करते थे और उनसे कभी कभी बदतमीजी से भी बात किया करते थे यह सब बातें को देखकर कुलदीप के दिल को बहुत बुरा लगा हो और बहुत बुरी ठेस पहुंचे इसके बाद उन्होंने यह निर्णय ले लिया था कि जब तक वह काबिल और सफल इंसान नहीं बन जाते अपने जीवन में कभी भी चैन से नहीं बैठेंगे और अपने पिताजी को रुतबा और वहां इज्जत समाज में दिला कर रहेंगे जिसके वह हकदार हैं। और उन्होंने करके भी कुछ ऐसा ही दिखाया उन्होंने लगातार मेहनत और प्रयास कर भारत देश की सबसे कठिन परीक्षा में से एक यूपीएससी को करा कर अपने सपने को साकार किया और अपने पिताजी को वह मान सम्मान दिलाया है जिसके वह हकदार थे।

2 बार फेल होने के बाद बने IAS अधिकारी

कुलदीप ने पूरी मेहनत के साथ यूपीएससी की तैयारी करना शुरू कर दिया. लेकिन पहली बार की परीक्षा में उन्हें बुरी तरह असफलता हासिल हुई. पहली बार की परीक्षा में वो प्रिलिम्स की परीक्षा भी पास नहीं कर पाए. इसके बाद उन्होंने अगले अटेम्ट की तैयारी करना शुरू कर दिया. इस बार प्री की परीक्षा तो पास कर गए लेकिन मेन्स की परीक्षा में फिर असफलता हासिल हुई.

परीक्षा की तैयारी करते हुए कुलदीप को 2 साल गुजर गए थे. परिवार की आर्थिक स्थिति अब बेटे की दिल्ली की पढ़ाई करवाने में असमर्थ हो रही थी. कुलदीप भी हिम्मत हार रहे थें लेकिन पिता ने फिर से बेटे को पढ़ने के लिए हौसला दिया. उन्होंने पिता की बात मानकर फिर से तैयारी करने लगे.इसबार कुलदीप (Kuldeep Dwivedi) ने रात-दिन एक करके मेहनत करना शुरू कर दिया. पिछले 2 सालों में परीक्षा में मिली असफलताओं से सीख लेकर उन्होंने तैयारी सटीक और एकाग्र होकर की.

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