पिता की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए नहीं थे 2 रुपये भी , फिर माँ के साथ चूड़ीयां बेचकर बन गया बेटा IAS !

 

क्या एक लड़का जिसने बचपन से किशोरावस्था तक केवल गरीबी देखी है और जिसे इतनी कठिनाइयों से गुजरना पड़ा है, क्या वह कभी आईएएस बनने का सपना देख सकता है? बहुत सारे लोग शायद इस सवाल का जवाब ना में देंगे, जो कुछ हद तक सही भी है। क्योंकि जब किसी व्यक्ति के सामने बहुत सारी चुनौतियाँ होती हैं और वह आसानी से उस पर काबू पा लेता है और अपने लक्ष्य तक पहुँच जाता है, तो ऐसा हर बार नहीं होता है। बहुत कम मनुष्य होते हैं जो संघर्षों को पार करके भी अपनी मंजिल तक पहुँच पाते हैं।

 

आज (IAS Success Story) हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बताने जा रहे हैं। रमेश घोलप का जन्म महाराष्ट्र के सोलनपुर जिले में हुआ था। रमेश बचपन से ही बहुत होनहार छात्र था और हमेशा पढ़ाई में अव्वल रहा। रमेश के पिता की साइकिल पंक्चर मरम्मत की दुकान थी, जिसमें 4 परिवारों के साथ रमेश के घर का खर्चा चलता था।

 

 

लेकिन रमेश के पिता को शराब की बुरी लत थी, जिसके कारण वह बीमार पड़ गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। रमेश के पिता घर में इकलौते कमाने वाले थे, इसलिए अब रमेश के परिवार को काफी परेशानी हो रही थी। घर में पैसों की कमी के कारण रमेश की माँ ने चूड़ियाँ बेचने का व्यवसाय शुरू किया और इस काम में रमेश और उसके भाई अपनी माँ का भरण-पोषण करने लगे।

 

 

लेकिन यहां उनकी जिंदगी में एक बड़ा तूफान आने वाला था, घर में मुश्किलों के बीच जहां मां और बच्चों को चूड़ियां बेचनी पड़ीं, इसी बीच रमेश के एक पैर में पोलियो हो गया। ज़िंदगी रमेश की परीक्षा क़दम-क़दम ले रही थी। बता दें कि रमेश बचपन से ही काफी होशियार छात्र थे और इसी वजह से वे शिक्षकों के बीच काफी लोकप्रिय थे।

 

रमेश के गांव में केवल एक प्राथमिक विद्यालय था, इसलिए उसकी मां ने उसे आगे की पढ़ाई के लिए उसके चाचा के घर भेज दिया था। रमेश का स्पष्ट विचार था कि अगर उसे अपने सिर से गरीबी का साया हटाना है, तो उसे कड़ी मेहनत करनी होगी और इसलिए वह पूरे मन से पढ़ाई करने गया।

 

Leave a comment

Your email address will not be published.