पिता की सरकारी दफ्तर में बेज्जती को देख, बेटी ने कलेक्टर बन खुद लिया बदला

हर वयक्ति में बहुत ज्यादा बदलाव आते हैं उसके पूरे जीवन में सभी उसका जीवन अच्छी चल रहा होता है तो कभी उसको जीवन में काफी घटनाएं होती हैं कभी अच्छे दिन आते हैं तो कभी बुरे देना दिन आते हैं और यह हम सभी के जीवन का एक हिस्सा है लेकिन आज हम आप सभी लोगों को महाराष्ट्र की रहने वाली एक किसान की बेटी की कहानी सुनाने वाले हैं जिन्होंने अपने पिता की बुरी हालत देख जो संकल्प लिया उसे पूरा करने के लिए जी जान लगा दी।

उस लड़की ने दिन भर कड़ी मेहनत और अपनी प्रतिभा के रिश्ते बिना किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट में गए आईएस की तैयारी करनी शुरू कर दी और अपने संकल्प को पूरा करने के लिए आईएएस ऑफिसर बन कर दिखाया और पूरे समाज में अपने पिता का नाम रोशन किया।

आईएएस ऑफिसर रोहिणी की पूरी कहानी

आजम आप सभी को बताने वाले हैं आईएएस ऑफिसर रोहिणी की कहानी के बारे में जो कि मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली है और उनके पिता एक छोटे से किसान है उसी गांव में रोहिणी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी विश्वविद्यालय से गरीब और वह बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में काफी तेज थी उन्होंने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया और भी अच्छा प्रदर्शन किया उनकी मेहनत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट की मदद के बिना आईएएस की परीक्षा निकाल दी केवल अपने दम पर।

रोहिणी के पिता ने आईएएस अधिकारी बनने के बाद यह बताया कि आखिर बेटी तुम्हारी टेबल पर इतनी ढेर सारी फाइलें आएंगी तो तुम उन्हें संभालने कागज की तरह मत देना उन्होंने सीख देते हुए कहा कि तुम्हारे एक निर्णय से लाखों लोगों की जिंदगी बदल सकती है और तुम्हें उस टाइम की अहमियत को समझना होगा ताकि तुम लोगों का भला कर सको और उनके जीवन में कुछ सुधार रहा था अपने पिता की सभी बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने कार्यभार को संभाला।

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