पिता को हो गया था “कैंसर” एग्जाम की तैयारी के दौरान, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी हौसला बुलंद कर बनी आईएएस अफसर

किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन के गोल तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है यह केवल और केवल उस व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कितनी मेहनत कर सकता है और कितना निर्भर होकर आने वाली मुसीबतों से लड़कर अपनी मंजिल तक पहुंच पाता है काफी लोग ऐसे होते हैं जो थोड़ी बहुत तकलीफ होगी कारण डर जाते हैं और अपना रास्ता बदल लेते हैं लेकिन कुछ लोग इतने दृढ़ निश्चय वाले लोग होते हैं कि वह लाखों कोट नहीं आने के बाद भी अपने पद पर अडिग रहते हैं और जब तक उन्हें मंजिल नहीं मिल जाती वह उसके लिए लड़ते रहते हैं और एक न एक दिन सफलता पाकर अपने जैसे और लोगों को प्रेरित करते हैं कि अगर आप की कोशिश और परिश्रम में सच्ची लगन है तो आप एक न एक दिन अपने जीवन में सफल अवश्य हो गए और दुनिया को यह कर दिखाओगे की मेहनत करने वाले की कभी हार नहीं होती।आज हम आप सभी लोगों को एक ऐसे आईएएस ऑफिसर की कहानी सुनाने वाले हैं जिन्होंने अनेकों कठिनाइयों का सामना किया लेकिन तौबा तो तब हो गई जब इनकी यूपीएससी के एग्जाम की तैयारी के दौरान के पिता को कैंसर हो गया उसके बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

पिता को था कैंसर लेकिन फिर भी हार नहीं मानी

जिस वक्त रितिका अपने पेपर के लिए तैयारी कर रही थी उसी वक्त उन्होंने अपने जीवन का सबसे मुश्किल पल भी बिताया। उस वक्त उनके पिताजी को टॉंग कैंसर हो गया। रितिका के लिए यह घड़ी बहुत ही ज्यादा दुख भरी थी। लेकिन फिर भी अपने सारे दुख दर्द को अंदर समां लिया। क्योंकि उन्हें अपने साथ-साथ अपने परिवार का भी हौसला बनाए रखना चाहिए उनके परिवार की हर एक व्यक्ति की उम्मीद मनो टूट गई थी। उन्होंने उस कठिन परिस्थिति में भी हार नहीं मानी और परिश्रम करती रही , जिसका फल उन्हें कुछ समय बाद में मिला। रितिका पढ़ने लिखने में बचपन से ही काफी तेज थी और हमेशा अपनी कक्षा में अव्वल आया करती थी। वह बचपन से अपने स्कूल में अपने टीचरों की चाहती थी।

upsc की परीक्षा के पहला प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी दोगुनी कर दी और रात दिन एक कर दिया अपने सपने को पूरा करने के लिए जिसका फल उन्हें कुछ समय बाद मिला और उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में पूरे भारत देश में 88 रैंक लाकर अपने सपने को साकार किया और उस एग्जाम को क्रैक किया।

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