बचपन में जूते की दुकान में करते थे काम, मेहनत और काबिलियत के दम पर बने IAS ऑफिसर, अब करते हे गरीबों के लिए ……….

यदि हम किसी आईएएस टॉपर के बारे में बात करते हैं तो हमेशा यही सोचते हैं कि वह एक अच्छे खाते परिवार से आता होगा और उसके परिवार का कोई ना कोई व्यक्ति सफल जरूर हुआ होगा लेकिन कई बार ऐसा होता है कि बच्चा अपनी काबिलियत के दम पर इस मुकाम को हासिल करता है जो कोई असाधारण बात नहीं है लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ही आईएएस ऑफिसर की कहानी सुनाने वाले हैं जो कि आर्थिक रूप से कमजोर थे और घर का कोई सदस्य उनका सरकारी नौकरी नहीं करता था इसके बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत के अपने सपने को पूरा किया।

बचपन से पढ़ाई में थे काफी तेज

आइए शुभम गुप्ता जयपुर के रहने वाले हैं और उनकी सातवीं कक्षा तक की पढ़ाई जयपुर से ही हुई है शुभम के पिताजी एक जूते के दुकान थी और दुकान पर शुभम भी बैठते थे घर का खर्चा चलाने के लिए अपने पिताजी की मदद करने के लिए उसके बाद वह अपने परिवार के साथ महाराष्ट्र गए और वहां के एक छोटे से विश्वविद्यालय में पढ़ने लगे आप बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में काफी थे और क्लास में हमेशा अच्छे अंक रहते थे शुभम ने स्कूल के बाद अपने पिताजी का जूते का दुकान भी संभाला और वहां पर काम भी करा घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए शुभम ने ऐसा कदम उठाया। लेकिन उन्होंने दिन भर काम करा तो रात में घर आकर पढ़ाई भी उसी लगन के साथ करें और ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी उन्होंने अपने प्रथम प्रयास में सफलता हासिल नहीं हुई। लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई पर दोबारा से ध्यान लगाते हुए एक बार और प्रयास था और उसके बाद सफलता उनके हाथ लग गई।

सन 2018 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी और इस परीक्षा में उन्होंने पूरे इंडिया में छठ वी रैंक लाकर अपनी मंजिल को पा लिया और पूरी दुनिया को अपने कदमों तले लाकर रख दिया यह उनके जीवन का चौथा प्रयास था यूपीएससी की परीक्षा बा लेकिन यहां उनकी कड़ी मेहनत और लगन का ही नतीजा था।

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