बचपन से ही नेत्रहीन होने के बावजूद भी मेहनत कर बाल नगेंद्र ने करा यूपीएससी क्लियर,…………

ज्यादातर समाज में यही देखा जाता है कि जो भी व्यक्ति विकलांग होता है वह अपने आप को और उसे अलग समझने लगता है और किसी हिचकिचाहट में रहता है कि वह इस समाज में कैसे रह पाएगा कुछ व्यक्ति किस प्रकार की आत्मग्लानि से जीवन जीते हैं तो कुछ व्यक्ति अपनी ही कमियों को सुधार कर जीवन में आगे बढ़ना सीख जाते हैं और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखते वह अपने जीवन में इतनी मेहनत करते हैं कि उनकी तकदीर खुद ही बदल जाती है और वह अपने जीवन में सफल व्यक्ति कितना आगे बढ़ने लगते हैं बिना किसी मुश्किल को।

आज हम आप सभी लोगों को कहानी सुनाने वाले हैं नागेंद्र जी की जिन्होंने नेत्रहीन होने के बावजूद भी अपनी मेहनत और लगन के दम पर यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को क्लियर कर दिखाया जो कि आम नौजवान युवकों के लिए मानो एक सपना सा है और लाखों ऐसे नौजवान युवक और युवतियां हैं जो हर वर्ष इस कठिन परीक्षा के लिए तैयारी करते हैं लेकिन किसी न किसी वजह से हर बार असफल हो जाते हैं इस कठिन परीक्षा में हर वर्ष केवल कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो अपनी सफलता तक पहुंच पाते है। बाल नागेंद्र जी ने हाल ही में आईएएस बनने का सपना अपने अपने नवे एटेम्पट में पूरा किया।

उन्होंने अपने जीवन में कुल मिलाकर इस परीक्षा को तीन बार पास किया है जिसमें से उन्होंने इस बार सफलता हासिल करें और अपने जीवन में आगे बढ़ने का निर्णय लिया वह आजकल के नौजवान पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन चुके हैं और आजकल के नौजवान युवक और युवतियों को उनसे सीख लेनी चाहिए कि किस तरीके से बाहर विकलांग होने के बावजूद भी अपने जीवन में हार नहीं मानी और इस प्रकार से आज अपने जीवन के सबसे अनोखे और सुखद मंजिल पर खड़े हैं।

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