मिसाल करी कायम लोगों के लिए एक दृष्टिबाधित महिला ने “पीएचडी सबसे कम उम्र में कर” रचा इतिहास

किस बात का तो आप सभी लोगों को पता होगी कि भारत देश में पुरानी कार में नारी को इतना मान सम्मान नहीं दिया जाता था लेकिन जैसे-जैसे देश प्रगति की ओर बढ़ता रहा उसी प्रकार से महिलाओं का भी सम्मान बढ़ता रहा और उन्हें हर जगह बराबर का तवज्जो दिया जाने लगा लेकिन अभी भी कुछ राज्य और कुछ गांव ऐसे हैं जहां पर महिलाओं को उनका हक अभी भी नहीं मिलता जिसके कारण उनको अपने जीवन में अनेकों प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है चाहे फिर वह किसी भी रुप में ले ले अगर वह आगे बढ़ कर पढ़ना चाहती है तो उसके लिए उनके घर वाले कभी कभी राजी नहीं होते और कम उम्र में उनकी शादी करा दी जाती है जिसके चलते उनकी कुछ कर गुजरने की चाहत मानो समाप्त हो जाती है और वहां एक साधारण से जीवन जीने लगते हैं।

कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा (Jyothsna Phanija)

ज्योत्सना फनिजा (Jyothsna Phanija) का जन्म आंध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले के कैकलुर गाँव में हुआ था। उनके लिए कामयाबी का यह रास्ता सरल नहीं रहा था, उन्होंने बहुत-सी चुनौतियों का सामना करके और संघर्ष करके अपनी पढ़ाई की। वे बचपन से ही दृष्टिबाधित थीं, लेकिन फिर भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा आंध्र ब्लाइंड मॉडल हाई स्कूल, नरसापुर से हुई, इस स्कूल से उन्होंने 10वीं कक्षा तक शिक्षा पूरी की।

फिर ज्योत्सना फनिजा आगे इतिहास, अर्थशास्त्र और नागरिक शास्त्र की पढ़ाई करना चाहती थीं, लेकिन कैकलूर गवर्नमेंट जूनियर कॉलेज की प्रधानाध्यापिका ने उनको इस कॉलेज में एडमिशन देने से इनकार कर दिया। अब ज्योत्सना फनिजा के आगे बहुत समस्या आ गयी थी कि वे आगे किस तरह पढ़ाई करें। अब या तो वे दृष्टिबाधित लोगों की तरह अपनी ज़िन्दगी गुजार सकती थीं अथवा कुछ ऐसा काम कर सकती थीं जिससे सभी को सीख मिले की दिव्यांग व्यक्ति भी असाधारण काम कर सकते हैं। हालांकि एक आम दृष्टिबाधित व्यक्ति की तरह ज़िन्दगी बिताना काफ़ी सरल था लेकिन ज्योति को यह मंजूर नहीं था उन्होंने कुछ भी करके अपने जीवन में कामयाबी हासिल करने की ठान ली थी।

फिर उन्हें कभी पीछे देखने की ज़रूरत नहीं पड़ी वह एक-एक करके सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ती गई। उन्हें बहुत सारी अकादमिक उपलब्धियाँ प्राप्त हुई। उन्होंने पोस्ट कॉलोनियल वुमेन राइटर्स पर PHD की है। वर्ष 2011 में ज्योत्सना फनिजा ने नेट का एग्जाम पास किया। उन्होंने बुक्स और मैगज़ीन्स में 10 रिसर्च आर्टिकल्स लिखे। इसके अलावा सेमिनारों और कॉन्फ्रेंसों में 6 रिसर्च पेपर भी प्रस्तुत किए।

जब उन्होंने पहली बार इंटरव्यू दिया था तो बहुत बार लोगों ने उन्हें अपमानित भी किया उनसे कई प्रकार के तरह तरह के प्रश्न पूछे गए इंसान को लज्जा हुई लेकिन जब उन्होंने एक बार मन में ठान ली और अपने पूरे परिवार के साथ इंटरव्यू दिए तो उनको सफलता हासिल हुई और उन्होंने महिलाओं के लिए इतिहास रच दिया और उन्हें कुछ कर गुजरने की सीख दी।

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