सेना में आने के जज्बे से मिली जीत – जानिए मेरठ के चार और जांबाज सेना में बने लेफ्टिनेंट, तीन के पिता सेना में कर चुके हैं सेवा !

क्रांतिधारा के लोगों का सीना एक बार फिर गर्व से चौड़ा हो गया है। मेरठ के चार वीर सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं। देहरादून और सिकंदराबाद में हुई पासिंग आउट परेड में सिद्धार्थ त्यागी, अनुराग राठौर, सनोवर अहमद और आशीष शर्मा को देश सेवा की कमान सौंपी गई. कोरोना की वजह से घरवालों ने भले ही इस ऐतिहासिक पल को न देखा हो, लेकिन उन्हें अपने बेटों पर गर्व है. तीन अधिकारियों के पिता सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

 

आईआईटी की तैयारी, एनडीए में मिली सफलता

गढ़ रोड स्थित सोमदत्ता सिटी निवासी लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ त्यागी ने बताया कि दीवान इंटरनेशनल स्कूल से 95 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास करने के बाद 2017 में उन्होंने आईआईटी की तैयारी शुरू की थी. इस दौरान उन्होंने एनडीए की एंट्रेंस टेस्ट दी। उनका चयन भी हो गया था।

 

उनके जुड़वां भाई ऋषभ त्यागी ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। वह इंफोसिस में इंजीनियर हैं। परिवार में पिता राजीव त्यागी केन्या में रामोदा सेरामिक्स लिमिटेड में मैनेजर हैं। वहीं, माता कविता त्यागी हाउसवाइफ हैं। सिद्धार्थ को पहली पोस्टिंग मिलने के साथ ही 21 दिन की छुट्टी दी गई है।

 

जुनून ने सिपाही को बनाया लेफ्टिनेंट

कंकरखेड़ा की तुलसी कॉलोनी निवासी अनुराग राठौर ने बताया कि 2009 में आर्मी पब्लिक स्कूल से उन्होंने 63 फीसदी अंकों के साथ बाहरी परीक्षा पास की थी. 2013 में सेना में सिपाही बने और चार साल तक इंजीनियर्स कोर में सेवा की। अफसर बनने का जुनून था।

 

आर्मी कैडेट कॉलेज से कमीशन के दौरान उन्हें लेफ्टिनेंट का पद मिला। उनकी पहली पोस्टिंग कारगिल के गढ़वाल राइफल्स और द्रास सेक्टर में हुई। पिता आरपी सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं और माता प्रतिला ठाकुर गृहिणी हैं। छोटा भाई मानस राठौर जालंधर में ही सेना में सेवारत है।

 

बचपन से ही था देश सेवा का जज्बा

फजलपुर के सैनिक विहार निवासी सनोवर अहमद ने एपीएस आर्य पब्लिक स्कूल से 79 प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं कक्षा पास की थी। वह एनडीए की प्रवेश परीक्षा पास कर इस मुकाम पर पहुंचे हैं। पिता इरशाद अहमद सेना से सेवानिवृत्त हैं। वहीं मां फरीदा बेगम हाउसवाइफ हैं।

 

तीनों भाई वसीम मेडिकल एरिया, शाहिद टीचर और सलमान डॉक्टर हैं। सनोवर ने कहा, “आज, जब मेरे माता-पिता मुझे देहरादून में आईएमए परिसर की पार्किंग में लेने आए, तो मुझे लगा कि मेरा बचपन का सपना सच हो गया है।” सनोवर 9 गार्ड्स की पहली पोस्टिंग पठानकोट में हुई है।

 

तकनीकी प्रवेश योजना से मिला गंतव्य

रोहता रोड स्थित शालीमार गार्डन निवासी आशीष शर्मा को भी देश सेवा का पद मिला। आर्मी पब्लिक स्कूल से 2016 में 93.2 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास करने वाले आशीष ने टेक्निकल एंट्री स्कीम के जरिए सेना में प्रवेश लिया।

 

2016 में गया स्थित ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी से बेसिक ट्रेनिंग करने के बाद कैडेट ट्रेनिंग विंग एमसीएमई सिकंदराबाद पहुंचा। वह ईएमई कोर में लेफ्टिनेंट रह चुके हैं। पिता संजीव शर्मा 20 दिसंबर को सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं, मां सुषमा देवी गृहिणी हैं। भाई अश्विनी शर्मा शिक्षक हैं। आशीष को कोरोना के चलते छुट्टी नहीं मिली है।

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