आखिर कैसे एक 12 वी पास 21 साल के लड़के ने बनायी लाखो की कंपनी और करा अनोखा काम

दोस्तों भगत सिंह ने एक बार कहा था की इंसान को अपनी लड़ाई खुद लड़नी होती है चाहे वो उसके हक़्क़ की हो या उसकी किस्मत बदलने की। आज हम शौर्य गुप्ता की ज़िन्दगी की कहानी बताने जा रहे है जिसने अपनी जान लगा दी अपना सपना पूरा करने में। शौर्य नॉएडा में अपनी माँ और भाई के साथ एक छोटे से घर में रहा करते थे।

शौर्य के पिता का दिहांत बचपन में ही होगया था और फिर उनकी माँ ने उन्हें बड़ी मुश्किलों से पढ़ाया और परवरिश करी। शौर्या एक औधोगिक क्षेत्र में रहते थे और वह रोज़ देखा करते थे वह के कर्मचारियों को आते जाते, वह उन्हें देख कर यह वादा करते थे की ज़िन्दगी में ऐसी ही एक बड़ी कंपनी खोलनी है और ऐसे ही हमारे साथ भी इतने लोग काम करे।

एक बार उनके घर के बहार एक आदमी पांच घंटो के लिए गाडी खड़ी करके चला गया और जब वापस आया तो शौर्या की माँ ने उसे एक थप्पड़ लगा दिया। शौर्या ने यह देख बारवी के बाद अपना पहला धंदा खोला जिसका नाम था बटन दबाओ गाडी हटाओ। लोगो ने इसे बहुत पसंद किया दिल्ली के CM ने भी काफी तारीफ करी पर उन्हें कही से पैसो की मदद नहीं मिली, कभी उधार लेना पड़ता तो कभी घर से लगाना पड़ता। उन कही न कही कामयाबी नहीं मिली फिर उन्होंने उसे बंद करदिया। कॉलेज समय के आने पर उनके भाई को तो दाखिला मिल गया पर उन्हें नहीं नसीब हुआ।

उन्होंने उस समय हिम्मत नहीं हारी और अपना एक रिज्यूमे बना कर 2-3 महीने में 25-30 इंटरव्यू दिए पर कही काम न बना। शौर्या बहुत टूट गया था लेकिन फिर एक कंपनी ने उन्हें चार हज़ार रूपए देने को कहा और कहा की हम आपकी जॉब लगवा देंगे। उन्होंने उस कम्पनी को मना करदिया और लगे रहे मेहनत करने में खुद के दम पर काम ढूंढ़ने में। शौर्या को आखिर एक काम मिला जॉब के पेम्पलेट लगाने का और उन्होंने वह किया भी लेकिन कुछ समय बाद जब उनके भाई को पता चला तो उन्होंने उसे यह काम करने से मना कर दिया। कुछ समय तक उन्होंने वह काम छोड़ दिया भाई के कहने पर लेकिन फिर उन्होंने वह काम दोबारा शुरू किया।

इस बार उन्होंने और मेहनत करी और कंपनी की तरफ से उनकी पहली कमाई 2500 रूपए आयी। उस पचीसों से उन्होंने एक कंपनी रजिस्टर किया, उन्होंने खबरि का काम शुरू किया जो लोगो को जॉब तो बताएगा लेकिन कोई पैसा नहीं लेगा उसका। धीरे धीरे उन्होंने पैसे कमाए और एक कर्मचारी को रखा जो MBA करा हुआ था। महीने के आखिरी में शौर्या के पास उसे देने को कुछ नहीं था तो उनकी माँ ने उसे पैसे देकर विदा किया और शौर्या को फिरसे घर पर बैठने को कहा। शौर्या को नाकामयाबी मंज़ूर नहीं थी तो उन्होंने दोबारा शुरू किया कुछ समय बाद और इस बार उन्होंने कुछ काम पर लोगो को रखा और खुद वेतन दिया उन्हें।

 

उनका काम सही चल रहा था तभी उन्ही के एक कर्मचारी ने किसी को जॉब लगाने के लिए पाँचसौ रूपए लेलिए जो की शौर्या के असुलो के खिलाफ था तो शौर्या ने उसे निकाल दिया और कंपनी बंद करदी। फिर कुछ समय बाद उन्होंने यह सोचकर दोबारा शुरू किया कि वह किसी कर्मचारी कि वजह से अपना काम ख़राब नहीं करेंगे तो उन्होंने इस बार और मेहनत करी और ढंग के लोगो को काम पर रखा। पहले जिस कंपनी में वह इंटरव्यू देने गए थे वहा पर अब वह अपना परपोसल लेकर गए थे। वहा का HR इन्हे भूल चूका था लेकिन शौर्या को याद था और फिर शौर्या ने उसे याद दिलाया। इस बार शौर्या को उस कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट मिला और धीरे धीरे शौर्या ने अपनी कंपनी को आगे बढ़ाया। शौर्या की कंपनी का टर्नओवर 25 लाख तक जाने लगा और वह कामयाबी की सिडिया चढ़ने लगे।

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