98 वर्ष की उम्र में भी “बेचते थे चने” नहीं बनना चाहते थे, किसी के ऊपर भोज ,कहानी कर दे कि आपकी आंखें नम….

ऐसे बहुत कम व्यक्ति होते हैं जो कि आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं वैसे तो हर एक व्यक्ति चाहता है कि वह आत्मनिर्भर है लेकिन जब उम्र का तकाजा हो जाता है तो उसे किसी ना किसी के ऊपर निर्भर होना ही पड़ता है लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो कि कभी भी अपने जीवन पर किसी पर निर्भर नहीं होना चाहते हैं और जब तक वह जीते हैं वह अपने बदौलत जीते हैं कुछ ऐसे ही कहानियां जाने वाले हैं जिसका आने को सुनने के बाद आप सभी लोगों की आंखें नम हो जाएंगी पूरी कहानी जानने के लिए आप सभी को बने रहना होगा अंत तक हमारे साथ। आज हम एक ऐसे इंसान के बारे में बताने जा रहे है वह दुनिया के लिए एक उदहारण हैं। आज भी धरती पर बहुत से ऐसे लोग पाए जाते हैं जो हमेशा आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। आइए फिर जानते हैं इनके बारे में।

उस व्यक्ति का नाम है विजय पाल सिंह जिन्होंने तकरीबन 92 वर्ष की उम्र में भी आत्मनिर्भर होने का जिम्मा था रखा है वह रायबरेली के हरचंदपुर में रहते हैं और एक छोटी सी दुकान चलाते हैं जिसमें वह चने बेचते हैं इसलिए चने की दुकान चलाते हैं क्योंकि वह अपने बच्चों के ऊपर बोझ नहीं बनना चाहते हैं और उनके किसी भी कार्य में बांधा नहीं बनना चाहते वह खुद के दम पर अपना गुजर-बसर करते हैं और अपने जीवन में आगे बढ़ रहे हैं विजय के दो बेटे हैं और दोनों ही बेटों की शादी हो चुकी है और वह दोनों अपने परिवारिक ग्रह दृष्टि में खुश हैं लेकिन जब लोगों को यह पता चला कि विजयपाल यहां दुकान केवल इसलिए चला रहे हैं कि वह अपने बच्चों के ऊपर बोझ नहीं बनना चाहते तो लोगों की आंखें नम हो गई क्योंकि वह अपना पेट भरने के लिए इतनी ज्यादा मन में इतना सारा काम कर रहे हैं चने के ठेले से जो थोड़ी बहुत कम होती है उससे उनका पेट पर जाता है और अपना जीवन खुशी से जीते हैं।

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