यूपी : चारों भाई बहन बने UPSC पास कर IAS IPS, पिता का सपना किया पूरा

आज हम आपको उत्तर प्रदेश राज्य के प्रतापगढ़ जिले के ऐसे परिवार से मिलवाने जा रहे हैं, जहां चारों भाई बहन आईएएस आईपीएस के पद पर नियुक्त हैं| उनके पिता अनिल मिश्रा, जो की ग्रामीण बैंक में मैनेजर के पद पर नियुक्त थे, वे आज इस बात पर गर्व महसूस करते हैं, और अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हैं|

पिता के हुए सपने साकार, चारों बच्चे बने आईएएस आईपीएस अधिकारी

चारों भाई बहन में सबसे बड़े योगेश मिश्रा, वर्तंमान में कोलकाता में राष्ट्रीय तोप एवं गोला निर्माण में प्रशासनिक अधिकारी हैं। दूसरे नंबर पर बहन क्षमा मिश्रा, एक IPS अधिकारी हैं, और वर्तमान में कर्नाटका में पोस्टेड हैं। उनके बाद हैं माधवी मिश्रा, जो वर्तमान में झारखंड कैडर की IAS हैं। और सबसे छोटे लोकेश मिश्रा, भी एक IAS अधिकारी हैं, और वर्तमान में बिहार के चंपारण जिले में ट्रेनिंग कर रहे हैं।

यूं तो प्रतापगढ़ के मिश्रा परिवार के चारों बच्चे बचपन से ही बहुत होशयार थे, लेकिन उनके पिता अनिल मिश्रा ने भी उनकी पड़े लिखाई में ज़रा भी कमी नहीं छोड़ी| वे हमेशा से ही चाहते थे की उनके बच्चे सिविल सेवा पास कर अधिकारी बनें, और आज उनका सपना साकार हो गया, क्योंकि उनके सारे बच्चों ने UPSC पास कर IAS आईपीएस के पद हासिल कर लिए हैं|

करना पड़ा संघर्ष, लेकिन संकल्प था दृढ़ तो हर मुश्किल हल होती गयी

सबसे बड़े भाई योगेश बताते हैं की, ‘ IAS अधिकारी बनने से पहले वे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और नोएडा में एक कंपनी में काम कर रहे थे, और उस समय उनकी दोनों बहनें क्षमा-माधवी सिविल सेवाओं की तैयारी कर रही थीं। रक्षाबंधन के एक दिन पहले जब दोनों बहनों के एग्जाम का रिजल्ट आया तो वे फेल हो गईं। जब योगेश राखी बंधवाने बहनों के पास गए तो उनका हौसला बढ़ाया और हिम्मत ना हरने को कहा| बस वही दिन था जब योगेश ने ठान ली की सबसे पहले वे खुद आईएएस अधिकारी बनेंगे ताकि भाई बहनों का मार्गदर्शन कर सकें| बस फिर उन्होंने कड़ी मेहनत की और पहले ही प्रयास में सफल हो गए और आईएएस बन गए| इसके बाद उन्होंने छोटे भाई-बहनों का मार्गदर्शन किया।

सभी भाई बहनों की उम्र में ज़्यादा फर्क नहीं है| अपने पुराने दिनों को याद करते हुए क्षमा बताती हैं की, वे सिर्फ दो कमरों के घर में रहते थे, जिस वजह से कोई मेहमान कभी आ जाये तो उन सबको पड़े में बहुत दिक्क्त आती थी| लेकिन ये उन सभी भाई बहन का दृढ़ संकल्प ही था और उनके पिता का अपने बच्चों पर विश्वास की आज उनके बच्चों ने पिता के सारे सपने पूरे कर उनको गौरवान्वित कर दिया है|

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