अब तो चीन ने करदी सारी हदे पार ।पडोसी बोला वूहान इंस्टिट्यूट को दो नोबल शांति पुरूस्कार

सुनकर शायद आप यकीन न करे लेकिन चीन कि मांग यही है कि वूहान इंस्टिट्यूट ऑफ़ बायोलॉजी को इसबार नोबल पुरूस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए। यह बयान बहुत हैरान करदेने वाला है क्युकी इस समय पूरी दुनिया इस बात का सच ढूंढ़ने में लगी है कि कोरोना वायरस जिसकी शुरुवात वूहान से हुई उसके पीछे क्या था, क्या यह कोई शाजिश थी या क्या था।

ऐसे समय में सीधे तौर पर चीन का यह कहना वूहान इंस्टिट्यूट ऑफ़ बायोलॉजी को नोबल पुरूस्कार देना चाहिए क्युकी कोविद कि दिशा में बोहोत सारे प्रयास वूहान इंस्टिट्यूट ने किए है। यह अपने आप में बहुत हैरान कर देने वाला ब्यान है। यह एक ऐसा ब्यान है जिसमे चाइना अपना चरित्र एक नाकाम सी कोशिश कर रहा है।

क्युकी आपको याद होगा जब WHO कि टीम वूहान जाने वाली थी उस वक़्त भी चीन ने सहयोग नहीं दिया था। बहुत से वैज्ञानिक थे उस टीम के उनके वीसा पास नहीं करे थे, और बड़ी मुश्किल से उनको वह आने कि अनुमति दी थी। ऐसे समय में जब कि पूरी दुनिया को साथ खड़े होना चाहिए।

ऐसे समय में जब कोरोना वायरस पूरी दुनिया में करीब चार मिलियन से भी ज्यादा जाने ले चूका है। उस समय में सीधे तौर पर यह कह देना, कि वूहान इंस्टिट्यूट को आप नोबल पुरूस्कार दीजिये तो दोस्तों यह वाकई बहुत हैरान कर देने वाली बात है। इसके अलावा चीन ने क्या किया है हम आपको बताते है।

चीन अपनी ही तरफ से एक पुरूस्कार इस इंस्टिट्यूट को दे चूका है। चिनेसे अकादमी ऑफ़ साइंसेज का आउटस्टैंडिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी अचीवमेंट प्राइज वूहान इंस्टिट्यूट को दे चूका जा चूका है और उसमे ख़ास दर्शाया गया है चीन कि बेथ लेडी के नाम से मशहूर उस साइंटिस्ट का भी जिनका नाम काफी चर्चा में रहा। अब एक सवाल यह उठता है कि यह ऐसा मामला है जिसपर पूरी दुनिया चिंता में है। पूरी दुनिया इस समय रुकी हुई है और इस सवाल का जवाब अभी तक मिला नहीं है, कि जो वायरस वूहान से सामने आया था, इसके पीछे क्या था, इसके पीछे का सच क्या है ?

दूसरी तरफ चिनेसे विदेश मंत्री इस बात का दावा क्र रहे है कि वूहान में इस वायरस के बारे में पता ज़रूर चला लेकिन यह उनके देश कि देन नहीं हो सकती बल्कि उन्हें तो सम्मानित किया जाना चाहिए क्युकी उन्होंने इतनी मेहनत करि है इस वायरस को रोकने में और चीन ने ही इस वायरस के बारे में पूरी दुनिया को बताया।

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