यू.पी. : मिलिए देश के पहले ऐसे डीएम से जो बन चुके हैं एक ओलम्पियन, और करेंगे पैरालिम्पिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिल्ली से सटे गौतम बौद्ध नगर के जिलाधिकारी के पद पर तैनात सुहास देश के पहले ऐसे डीएम हैं जो टोक्यो ओलंपिक्स में भाग लेने जा रहे हैं| 24 अगस्त से शुरू होने वाले पैरालिम्पिक्स में 2007 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी सुहास लालिनाकेरे यतिराज टोक्यो पैरालिंपिक में पैरा-बैडमिंटन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे|

नोएडा के डीएम सुहास एल यतिराज इस साल टोक्यो पैरालिंपिक में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी अप्रैल 2020 में अपनी वर्तमान नौकरशाही भूमिका में शामिल होने के बाद से कोविड महामारी से लड़ने में व्यस्त हैं, लेकिन 24 अगस्त से शुरू होने वाले विश्व आयोजन में पदक जीतने और देश को गौरवान्वित करने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि टोक्यो प्रतियोगिता निस्संदेह एक चुनौती होने वाली है। दुनिया में तीसरे नंबर के होने के नाते, अत्यधिक प्रतिस्पर्धी आयोजन में उनकी अपनी बर्थ हाल तक अनिश्चित थी। एक जिला मजिस्ट्रेट और एक पेशेवर बैडमिंटन खिलाड़ी होने की दोहरी भूमिकाओं के प्रबंधन पर, कर्नाटक में जन्मे सुहास ने कहा कि किसी भी गतिविधि के लिए जुनून और प्यार ने उन्हें संतुलन बनाए रखने में मदद की है। पिछले डेढ़ साल में, उन्होंने कहा कि उन्होंने कोविड की स्थिति को देखते हुए काम के बाद रात में बैडमिंटन में अभ्यास किया और खुद को प्रशिक्षित किया।

झेलनी पड़ी बहुत परेशानियां, लेकिन इनसे ऊपर उठकर सुहास बने आईएएस अधिकारी के साथ-साथ दुनिया के तीसरे पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी

सुहास, जो पहले इलाहाबाद और आजमगढ़ सहित उत्तर प्रदेश के लगभग आधा दर्जन जिलों में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में काम कर चुके हैं, और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग ले चुके हैं, ने बताया की उनके माता-पिता ने उन्हें अपने जूनून को आगे ले जाने के लिए बहुत समर्थन दिया| क्योंकि सुहास को जन्म से ही अपने एक पैर में दिक्कत थी, इसीलिए लोग उन्हें बहुत ताने मारते थे, लेकिन उनके माता पिता उनके आगे ढाल की तरह खड़े थे और उन्होंने कभी भी अपने बेटे को किसी भी तरह से इन तानों की वजह से टूटने नहीं दिया|

वैसे तो सुहास कभी आईएएस अधिकारी नहीं बनना चाहते थे, लेकिन पिता की मौत से उनको बहुत क्षति पहुंची, और इसके बाद उन्होंने संकल्प ले लिया की वे सिविल सर्विसेज में अपना करियर बनाएंगे| और एक मन लगाकर तैयारी शुरू कर दी| जब उन्होंने अपने सिविल सर्विस कर सपना पूरा कर लिया और आईएएस बन गए, उसके बाद भी वे रुके नहीं और अपना दूसरा जूनून बैडमिंटन का प्रति दिन अभ्यास करते रहे|

2016 में उन्होंने अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय मैच खेला लेकिन इस बार उनको हार मिली, लेकिन अब तक वे समझ चुके थे की उनको ऐसा क्या फार्मूला अपनाना चाहिए की उनको जीत मिले| बीएस फिर क्या था, तब से अब तक जीत हमेशा उनके कदम चूम रही है, और वे अपनी श्रेणी में दुनिया के तीसरे पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी बन चुके हैं|

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