यू.पी. : डॉक्टरों ने सीने से निकाला 4 किलोग्राम का ट्यूमर, पीठ की मांसपेशियों से भरी जगह

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक खबर सामने आयी जिसमे डॉक्टरों ने कमाल कर दिया| वैसे तो डॉक्टरों जान बचाने वाले मसीहा की तरह माना ही जाता है लेकिन इस बार यह साबित भी हो गया जब गोरखपुर में डॉक्टरों ने एक ट्यूमर के मरीज का ऑपरेशन कर उसके सीने से चार किलोग्राम का फुटबॉल जैसा ट्यूमर निकाला और उसे नया जीवनदान दिया|

डॉक्टरों ने मरीज के सीने से निकाला 4 किलोग्राम का ट्यूमर, और बचाई उसकी जान

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की एक टीम ने एक युवक के सीने से चार किलोग्राम का फुटबॉल के आकार का ट्यूमर ऑपरेशन कर निकाला। यह ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज में करीब 6 घंटे तक चला। यह ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जरी विभाग के प्रो. अशोक यादव और प्लास्टिक सर्जन डॉ. नीरज नाथानी की संयुक्त टीम ने किया। पीड़ित युवक मऊ का रहने वाला है और उसकी उम्र 40 वर्ष है।

वह ट्यूमर से पिछले चार साल से पीड़ित था और इस दौरान युवक ने इसका निजी अस्पतालों से ऑपरेशन भी करवाया था लेकिन दोनों ही बार ऑपरेशन असफल रहा और उसके सीने से ट्यूमर पूरी तरह से नहीं निकला। और ऑपरेशन के असफल होने की वजह से ट्यूमर का आकार और बड़ा हो गया। ट्यूमर गले की नस और सीने की पसलियों में फैल गया, जिस वजह से पीड़ित बहुत तकलीफ में था और एक दिन परिजन युवक को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। प्रारंभिक जांच से पता चला की ट्यूमर कैंसर में बदल रहा है।

ऑपरेशन में थी बहुत सारी चुनौतियाँ

ऑपरेशन 6 घंटे तक चला था और इसमें बहुत सारी चुनौतियाँ थी और पीड़ित की ज़िन्दगी पर लगातार खतरा बना हुआ था| क्योंकि ट्यूमर पसलियों तक पहुंच गया था, इसीलिए उसकी पसलियों की हड्डियां गलने का खतरा बना हुआ था, इसके अलावा ट्यूमर ने गले की नस और उसके आसपास की मांसपेशियों को बहुत प्रभावित कर दिया था। क्योंकि ट्यूमर निकालने के बाद सीने में एक गड्ढा जैसा स्थान बन गया था इसीलिए यह बहुत महत्वपूर्ण था की उस रिक्त हुए स्थान को भरा जाये और क्योंकि कैंसर की दस्तक का भी पता जांच में चल गया था तो ज़रूरी था की उस स्थान की अच्छे से सिखाई हो जाये ताकि सारे कीटाणु मर जाएं और पीड़ित को और कोई खतरा न हो।

डॉ. अशोक यादव ने बताया कि ट्यूमर पीड़ित के गले के बाएं तरफ एक महत्वपूर्ण नस तक पहुंच गया था और यह नस दिमाग से खून दिल तक ले जाने का काम करती है पर उन्हें इस नस को काटना पड़ा। इसी प्रकार की एक नस दाएं तरफ भी होती है, और इसी से पीड़ित का जीवन चल रहा है। ऑपरेशन के बाद सीने में रिक्त हुए स्थान को भरने के लिए पीड़ित की पीठ से स्किन और मांसपेशियों को काटकर सीने में उसे फिर से रिकंस्ट्रक्ट किया गया। इसका फायदा यह है कि सिंकाई के दौरान यह सैल प्रभावित नहीं होंगे और पीड़ित की मासपेशियां जल्दी जुड़ जाएँगी और भविष्य में पीड़ित को कोई दिक्कत नहीं होगी। इस तकनीक को फ्लैट सर्जरी कहते हैं। और ख़ुशी की बात यह है की ऑपरेशन के बाद से मरीज की हालत में सुधार है।

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