खाने के तेल होगा सस्ता, वित्त मंत्री ने दी यह खुशखबरी

पेट्रोल, डीजल की तरह, खाने के तेल की कीमत भी आसमान छू रही हैं, सरसों से लेकर रिफाइंड तेल सबके दाम काफी तेज़ हैं, ऐसे में रोज़मरह की ज़िन्दगी में इस्तेमाल होने वाला यह तेल एक साधारण इंसान के लिए काफी महंगा साबित होता है, और उसे यह खरीदने कि लिए काफी संघर्ष करने पड़ते हैं| हालांकि वित्त मंत्री ने यह आश्वासन दिया है की जल्द ही खाने के तेल की कीमत में गिरावट आएगी|

खाने के तेल की कीमतों में आएगी गिरावट, वित्त मंत्री ने बताया

वित्त मंत्री ने बताया की भारत में खाने के तेल पर जनता की निर्भरता बहुत अधिक है, और लगभग हर प्रकार के व्यंजन में खाने के तेल इस्तेमत में आता है| तिलहन के उत्पादन की वजह से खाने कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी और पिछले वर्ष क्रूड और रिफाइंड तेल का आयत भी रोक दिया गया था, जिस वजह से कीमतें तेज़ हो गयी| इस वर्ष से फिर से इनका आयात शुरू हुआ हैं, और सब यही उम्मीद कर रहे हैं, कि जल्द ही खाने के तेल की कीमतों में राहत होगी |

हालांकि कुछ सूत्रों के मुताबिक, भारत में खाद्य तेल की कीमतों में तेल की एक विस्तृत श्रृंखला में गिरावट की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने से खाद्य तेलों की कीमतों में कमी आ रही है। कुछ मामलों में, गिरावट लगभग 20% तक है|

7 मई 2021 को पाम ऑयल की कीमत 142 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब घटकर 115 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, जो 19% की गिरावट है। जबकि, 5 मई 2021 को सूरजमुखी तेल की कीमत 188 रुपये प्रति किलोग्राम थी, अब यह 16% की गिरावट के साथ 157 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। सोया तेल की कीमत 20 मई 21 को 162 रुपये प्रति किलोग्राम थी, अब यह मुंबई में 15 फीसदी की गिरावट के साथ 138 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है।

सरसों के तेल के मामले में, 16 मई 2021 को कीमत 175 रुपये प्रति किलोग्राम थी, अब यह लगभग 10% की गिरावट के साथ 157 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। जबकि 14 मई 2021 को मूंगफली के तेल की कीमत 190 रुपये प्रति किलोग्राम थी, अब यह 8% की गिरावट के साथ 174 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। 2 मई 2021 को वनस्पति की कीमत 154 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब 8% की गिरावट के साथ 141 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है।

क्यों होता है खाने का तेल महंगा?

खाद्य तेल की कीमतें जटिल कारकों पर निर्भर करती हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय कीमतें, घरेलू उत्पादन भी शामिल हैं। क्योंकि घरेलू खपत और उत्पादन के बीच का अंतर अधिक है, इसलिए भारत को बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का आयात करना पड़ता है। सरकार इस मुद्दे को स्थायी रूप से हल करने के लिए मध्य और दीर्घकालिक उपायों की एक श्रृंखला पर काम कर रही है, ताकि वह भारत को खाने के तेल के उत्पाद के सम्बन्ध में आत्मनिर्भर बना सके |

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