पिता की मौत भी नहीं तोड़ पायी हिम्मत, अब यह काम करके चलाती है पूरा घर

जब सोनी के पिता की मौत हुई तो उसके ठीक पांच दिन बाद सोनी को अपनी नौकरी ज्वाइन करनी थी| पिता की मौत से पूरे घर में मातम छा गया था| सभी टूट चुके थे| ऐसे में तीसरे नंबर की बेटी सोनी ही थी जिसने खड़े होने की हिम्मत दिखाई और अपने परिवार का सहारा बनी| उसने पिता की मौत के बाद भी खुद को टूटने नहीं दिया और अपनी नौकरी ज्वाइन की| आज सोनी अपनी इस नौकरी से अपने पूरे परिवार का पेट पाल रही हैं, और सबके लिए एक उदाहरण बन रही है|

सिर से पिता का साया उठा, पर नहीं मानी हार, आज यह नौकरी कर बन गयी है परिवार का सहारा

सोनी और आठ भाई बहन हैं, और उनमें सोनी तीसरे नंबर की है| हिसार के गांव राजली की रहने वाली सोनी आज हिसार डिपो में मैकेनिकल हेल्पर के पद पर कार्यरत है। सोनी की हिसार डिपो में नौकरी ज्वाइन करने से पांच दिन पहले ही उनके सिर से पिता का हाथ उठ गया| जब पूरा परिवार बिखर चूका था, तब एक सोनी ही थी जिसने हिम्मत दिखाई थी, और इतने बड़े घाव के बाद भी अपनी नौकरी ज्वाइन की| आज सोनी की आय से ही पूरे परिवार का गुज़ारा होता है|

मार्शल आर्ट के पेंचक सिलाट गेम में एक जाबाज़ खिलाड़ी सोनी अब तक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उनका बेहतरीन प्रदर्शन ही है, जिस वजह से आज वह हिसार डिपो में नौकरी कर रही हैं|

पिता ने किया था खेल के लिए प्रेरित

सोनी के पिता ही थे जिन्होंने उन्हें इस खेल के लिए प्रेरित किया| वह चाहते थे की उनकी बेटी खिलाड़ी बनकर देश के लिए पदक लाये| पिता की सलाह मानकर जब सोनी ने खेलना शुरू किया तो उन्होंने लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीता, और इसी खेल के तहत आज सोनी हिसार डिपो में ग्रुप डी में मैकेनिकल हेल्पर के पद पर कार्यरत है, और हर रोज़ बसों की मरम्मत करती हैं| सोनी की यह हिम्मत देख सभी हैरान रहे जाते हैं|

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