जानें झुग्गी में पली उम्मुल की कहानी, जिन्होंने विकलांगता को हरा पूरा किया आईएएस बनने का सपना

कहते हैं पंखों से कुछ नहीं होता, हैसलों से उड़ान होती है, और इसे सच साबित किया उम्मुल ने, जिन्होंने कठिन परिथितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी, और अपने पर पूर्ण विश्वास रख आगे बढ़ती चली गयी| उम्मुल खेर हम सभी के लिए एक मिसाल हैं| उन्होंने कभी अपनी गरीबी और विकलांगता को अपने सपनों के आड़े ना आने दिया| जब उनका साथ किसी ने ना दिया, तो खुद पर ही आत्म विश्वास रख वह आगे बड़ी, और आज आईएएस बन अपना सपना पूरा कर लिया|

गरीबी और विकलांगता भी ना आ पाए जुनून के आगे, यूपीएससी पास कर उम्मुल बन गयी सबके लिए एक मिसाल

उम्मुल का जन्म राजस्थान में हुआ था, लेकिन जब वह पांच साल की थी तो उनका परिवार दिल्ली में आकर बस गया था, और वे लोग हज़रत निजाम्मुद्दीन के पास बारापुला में एक झुग्गी बस्ती में रहने लगे| उम्मुल की अपनी माँ नहीं थी, और सौतेली माँ से कभी किसी चीज़ का समर्थन नहीं मिला| एक बार जब उनकी झुग्गी टूट गयी और वे बेघर हो गए, तो बहुत मुश्किल के पैसे जुटाकर दिल्ली में त्रिलोकपुरी में एक सस्ता घर लिया| क्योंकि उनके पिता रेलवे जंक्शन के पास सामान बेचा करते थे तो पैसों की तंगी हमेशा रही|

कठिन परिस्तिथियों के बावजूद उम्मुल ने पास की यूपीएससी, और पेश की मिसाल

ऐसे में उम्मुल को ही उस मकान का किराया भरने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना पढ़ा| वह खुद सातवीं कक्षा में थी, जब उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया, इसके बाद आठवीं से पढ़ने की इजाज़त नहीं मिली| उम्मुल पढ़ना चाहती थी, इसीलिए उन्होंने घर छोड़ दिया और दूसरी जगह रहने लगी, वह खुद भी पढ़ती थी और बाकी बच्चों को भी पढ़ाती थी| इसके बाद दसवीं से उन्हें स्कालरशिप मिल गयी, जिसके बाद बारवीं तक की पढ़ाई स्कालरशिप से हुई|

क्योंकि बारहवीं में उम्मुल ने टॉप किया था तो दिल्ली विश्वविद्यालय में उन्हें दाखिला मिला, जिससे स्नातक वहीँ से किया| इसके बाद स्नातकोत्तर उन्होंने जेएनयू से किया| पढ़ाई पूरी करने के बाद वह एक साल जापान में रही| लेकिन जब वापिस आयी तो उम्मुल ने पीएचडी में दाखिला लिया और साथ ही साथ यूपीएससी की तैयारी कर, पहले ही प्रयास में सफलता पा ली और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आईएएस बन, सबके सामने एक उदाहरण पेश किया|

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