स्कूल की छुट्टियों में लाइब्रेरी में जा कर पढ़ाई करी। पहले प्रयास में असफल हुई लेकिन दूसरे प्रयास में बनी IPS विशाखा भदाणे

दोस्तों अगर मन से सच्ची लगन हो और म्हणत करने की ठान ली हो, तब आपको कामियाबी एक न एक दिन ज़रूर मिलेगी। बोहोत लोगो का कहना है की सफता को पाने के लिए सुख सुविधाओं का होना ज़रूरी है, पर यह बात बिलकुल भी सच नहीं हैं। अगर आप गौर दे तो बहुत से ऐसे लोग आपके आस पास होंगे जिन्होंने अपनी ज़िन्दगी में कड़ी मेहनत करके की सफलता प्राप्त करी है। आज हम आपको ऐसे ही एक लड़की की सफलता की कहानी बताने जा रहे है जिसने IPS का पद हासिल करने के लिए किस तरह ज़िन्दगी में मुश्किलों का सामना किया।


डॉक्टर विशाखा भड़ाने नासिक महाराष्ट्र की रहने वाली है औरउनके पिता अशोक भड़ाने एक स्कूल में चपरासी का काम करते है। विशाखा के पिता का सपना था की उनके बच्चे खूब पड़े लिखे और ज़िन्दगी में सफलता हासिल करके एक अच्छे पद के अफसर बने। लेकिन दोस्तों उन्हें घर के हालात बहुत ख़राब थे, विशाखा के पिता के पास इतना पैसा नहीं था की वह घर के खर्चे के साथ साथ पढ़ाई के लिए भी उत्तम पैसा दे सके या उन्हें महंगी शिक्षा प्रदान करा सके।

अशोक जी काम अंदानी होने के बावजूद भी अपने बच्चो की शिक्षा पर कोई कमी नहीं आने देते थे। घर का खर्चा और शिक्षा का खर्चा संभालने के लिए वर्षा की माँ ने स्कूल के बाहर ही एक छोटी सी दूकान खोल ली जिससे विशाखा के परिवार का खर्च तोडा बहुत संभल जाता था। पुष्तकों की कमी के कारण जिस आबे समय स्कूल बंद हुआ करते थे तब विशाखा और उसके भाई बेहेन स्कूल की लाइब्रेरी में जाकर किताबे पढ़ा करते थे। उनकी इतनी कड़ी मेहनत और लगन देख कर उनके शिक्षक भी सहारा करते थे और उनका मनोबल बढ़ाते थे।


विशाखा जब 19 वर्ष की हुई तब कुछ समय बाद ही उनकी माता का स्वर्गवास हो गया था। माँ के जाने से घर की साड़ी जिम्मेदारी विशाखा पर आ गयी थी। तो अब उन्हें पहले घर के काम निपटने पढ़ते अपने परिवार की देखभाल करनी पड़ती और फिर वह अपनी पढ़ाई करती थी। विशाखा ने अपने भाई से साथ सरकारी आयुर्वेद कॉलेज से BAMS में दाखिला लेने के लिए परीक्षा दी थी और वोह दोनों ही उसमे पास होगये और चुने गए थे। विशाखा के पिता अशोक जी ने अपने बच्चो की आगे की पढ़ाई के लिए एक लोन ले लिया था। BAMS की शिक्षा समाप्त करने के बाद विशाखा ने UPSC की परीक्षा देने का सोचा और उसके लिए पढ़ाई करने लग गयी थी।

काफी मेहनत के बाद भी वर्षा पहली परीक्षा में असफल होगयी। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और फिर से दिल लगा कर पढ़ाई करी और दूसरी बार परीक्षा में बैठ गयी। लेकिन दोस्तों इस बार वर्षा सफल हो गयी और वर्क्षा 2018 में UPSC में सफलता हासिल करके IPS बानी। वर्षा की सफलता की कहानी हमे बताती है की ज़िन्दगी में गरीबी या मुश्किलें आने से सफलता का रास्ता कठिन ज़रूर हो सकता है लेकिन नामुमकिन नहीं, और अगर आप एक बार ठान ले किसी चीज़ को पाने की तो आप उसे अपनी मेहनत के दम पर ज़रूर हासिल कर सकते है।

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