कैसे इतनी गरीबी से निकलकर टीम इंडिया तक आए हैं यह पांच क्रिकेटर?

 

अक्सर ऐसा देखा गया है की कड़ी मेहनत और मशक्कत के बिना सफलता हासिल नहीं होती है । जो कि शत प्रतिशत सत्य है। ऐसे में अपनी आज के इस पोस्ट के जरिए हम आपको बताना चाहते हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम के वे कौन से खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपने बचपन के दिनों में काफी गरीबी संघर्ष एवं कठिनाइयों का सामना किया है । और आज वह इस मुकाम पर आ पहुंचे हैं जहां हर कोई उनके जैसा बनना चाहता है।

कौन से हैं वे खिलाड़ी?

इन खिलाड़ियों की लिस्ट में सबसे पहला नाम भारतीय क्रिकेटर एवं एक दमदार ऑलराउंडर खिलाड़ी रविंद्र जडेजा का है। जिन्होंने क्रिकेट की दुनिया में अपनी सफलता का वो डंका बजाया है कि आज भी भारतीय टीम के पास उन जैसा कोई दूसरा ऑलराउंडर नहीं है। पर अगर बात करें इनके शुरुआती दिनों की तो उनका बचपन काफी कठिनाइयों में गुजरा है । उन्होंने काफी गरीबी का सामना भी किया है । रविंद्र जडेजा के पिता जहां एक सिक्योरिटी गार्ड हुआ करते थे वही उनकी मां एक नर्स हुआ करती थी । उनके पास खुद का घर भी नहीं था जिस वजह से वह सरकारी क्वार्टर में रहा करते थे । जहां उन्होंने बेहद ही मुश्किल दिनों का सामना किया था। गरीबी से निकले खिलाड़ियों की बात करें तो उनमें एक और सबसे बड़ा नाम भारतीय पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का भी आता है । महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया के एक बेहद ही दिग्गज खिलाड़ी है । महेंद्र सिंह धोनी आज भारत के ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लाखों फैंस के दिलों पर राज करते हैं । एवं भारत के सबसे अमीर क्रिकेटर भी है । लेकिन इस मुकाम को हासिल करने के लिए उन्हें काफी मेहनत एवं मशक्कत का सामना करना पड़ा है । धोनी के पिता एक पंप ऑपरेटर हुआ करते थे धोनी ने अपने शुरुआती दिनों में टिकट कलेक्टर के रूप में रेलवेज में भी काम किया है । जैसा कि उनकी बायोपिक एम एस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी में प्रदर्शित किया गया है।

गेंदबाज भी हैं इस लिस्ट में शामिल?

इस लिस्ट में गेंदबाजों की भूमिका भी बेहद अहम है । भारत के कई बेहतरीन एवं दिग्गज गेंदबाज काशी गरीबी एवं संघर्ष का सामना करके टीम इंडिया में अपनी जगह बना पाए हैं । उन्हीं में से एक गेंदबाज है भुवनेश्वर कुमार । उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर में जन्मे भुवनेश्वर कुमार ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपने जिंदगी में बेहद ही बुरा वक्त देखा है । उनके पास क्रिकेट खेलने के लिए जूते भी नहीं हुआ करते थे । ऐसे ही एक गेंदबाज का नाम है उमेश यादव। उमेश यादव आज किसी भी पहचान के मोहताज नहीं है। उन्होंने टीम इंडिया में अपनी अलग जगह बनाई है उनके पिता एक कोयला कारखाने में काम किया करते थे और ऐसे में इनके घर में आर्थिक समस्याएं अक्सर ही रहा करती थी उमेश यादव बताते हैं। कि उनके पास कभी-कभी तो दो वक्त की रोटी खाने के लिए भी पैसे नहीं होते थे किंतु आज यह सभी खिलाड़ी अपने जीवन में सफलता के चरम पर है । एवं हमारे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।