जानिये क्या है उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में मनाई जाने वाली कजरी तीज का महत्व

हर वर्ष तीज हमारे देश में खूब हर्षोलास के साथ मनाया जाता है| यह एक ऐसा पर्व है जिसमे विवाहित महिलाएं अपने पति के लिए उपवास करती हैं और भगवान शिव और देवी पार्वती से अपने पति की लंबी उम्र और कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं। भारत में, तीन प्रकार के तीज त्योहार मनाए जाते हैं – हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज।

धूम धाम से मनाई जा रही है कजरी तीज, जानें क्या है इसका महत्व

ये सभी तीज के पर्व जुलाई, अगस्त और सितम्बर के महीनों में मनाये जाते हैं| ये व्रत भी करवा चौथ जितने ही कठिन होते हैं क्योंकि इन व्रतों में भी महिलाएं उपवास के दौरान पानी का सेवन तक नहीं करती हैं। कजरी तीज, जिसे बड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है, इस वर्ष आज 25 अगस्त को मनाई जा रही है। हरियाली तीज या छोटी तीज 11 अगस्त को मनाई जा चुकी है और हरतालिका तीज 9 सितंबर को मनाई जाएगी।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह भाद्रपद के महीने में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। कजरी तीज 24 अगस्त को शाम 4:04 बजे शुरू हो गयी है और आज 25 अगस्त को शाम 4:18 बजे समाप्त होगी।

क्या है कजरी तीज का महत्व

“कजरी” शब्द की उत्पत्ति लोक परंपरा में हुई है जो एक महिला की अपने पति से थोड़े समय के अलगाव के दौरान होने वाली पीड़ा का वर्णन करती है। त्योहार को मानसून के मौसम से भी जोड़ा गया है। तीज के दिन महिलाएं अपने पैतृक घर जाती हैं। वे शिव-पार्वती और चंद्रमा और नीम के पेड़ से भी अपने पति की लम्बी उम्र और कल्याण की प्रार्थना करती हैं। तीज का व्रत केवल विवाहित महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, अविवाहित महिलाएं भी इसे अपनी इच्छा के जीवन साथी के लिए कर सकती हैं।

त्योहार के दिन महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं, अपने हाथों पर मेहंदी लगाती हैं और निमड़ी माता की पूजा करती हैं। वे व्रत कथा भी सुनती हैं और चंद्रमा से प्रार्थना करने के बाद अपने पति के लिए एक गिलास पानी लेकर अपना व्रत तोड़ती हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में महिलाएं रक्षा बंधन के तीन दिन बाद कजरी तीज मनाती हैं। इस साल यह 25 अगस्त को मनाया जा रहा है।

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