बचपन में एक पेंसिल की वजह से चली गई आंख की रोशनी, अब बनीं देश की पहली नेत्रहीन IAS

आईएएस की परीक्षा एक ऐसी परीक्षा है जिसे उत्तीर्ण करने के लिए लोग सालों से प्रयास करते रहते हैं। लोगों का सपना होता है। कि वह किसी भी प्रकार से एक बार इस प्रकार की परीक्षा में सफल हो जाए तो उनका जीवन सफल हो जाएगा। लेकिन यह सपना देखना तो बेहद ही आसान होता है। इसे पूरा करते हुए तो मानो सालों लग जाते हैं और किसी किसी का सपना तो पूरा भी नहीं हो पाता है।

लगभग देश का हर एक दूसरा नौजवान इस परीक्षा पास करना चाहता है। लेकिन सपने पूरे होते हैं जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करता है यूपीएससी की परीक्षा में सफलता मिलने की खुशी अलग ही होती है। लेकिन यह बात भी सच है आज के इस पोस्ट में हम आपको ऐसे ही आईएएस अफसर के बारे में बताने वाले हैं जिन्होंने अपने जीवन में अनेको कठिनीएओ को झेला , ताकि वह किसी भी तरीके से आईएएस अधिकारी बन सके और अपने जीवन के लक्ष्य को पा सकें।

Kerala: Pranjal Patil, India’s first visually challenged woman IAS officer takes charge as Sub Collector of Thiruvananthapuram. pic.twitter.com/opUn08uu6X

— ANI (@ANI) October 14, 2019

बचपन से ही पढ़ाई में थी बेहद होशियार

आज हम आप सभी लोगों को एक ऐसी लड़की की कहानी सुनाने वाले हैं जो कि नेत्र हिंसा को हराकर सफलता के मुकाम तक पहुंची और लोगों के लिए इतिहास बना दिया। उन्हें बचपन में अनेकों प्रकार की बीमारियों से जूझना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी अपने जीवन में हार नहीं मानी और अपनी हर एक मुसीबत को अपने आगे का नया रास्ता बनाती हुई और अपने जीवन में आगे बढ़ती रही। उन्होंने सन 2014 में यूपीएससी परीक्षा को सफलता हासिल कर अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त किया लेकिन इस पद को पाने के लिए उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण समय को दिया और अपने मेहनत और लगन का ही परिणाम था कि वह आज इस मुकाम पर खड़ी है।

माता पिता ने दिया था हर कदम पर साथ

सिविल परीक्षा की तैयारी करने के लिए उन्होंने बेनो ने ब्रेल लिपि में लिखी गई किताबों को ढूँढना शुरू कर दिया। उसके बाद उन्होंने जी लगाकर चेन्नई से आईएएस की तैयारी करनी शुरू कर दी और इस तैयारी में उन्होंने कंप्यूटर में भी ऐसे कई सॉफ्टवेयर डलवाए जिसकी मदद से वहां आसानी से अपनी पढ़ाई को अंजाम दे सकते हैं और बिना किसी रूकावट के अपने सपने तक पहुंच सकते हैं। इस पूरे कार्य में उनकी मां ने उनका हर कदम पर साथ दिया। उनके माता-पिता ने उन्हें हर उस मोड़ पर प्रेरित कर आ जाओ उनको जरूरत थी।

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