ट्रकवालों के झूठे बर्तन धोने वाला सचिन अब बन गया है करोडो कि संपत्ति का मालिक – क्या था सफलता का राज़

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दोस्तों आज में आपको एक जिसने बचपन में चाय बेचीं, जिसके पिता बच्चो को पालने के लिए पल्लेदारी किया करते थे, और घर का हाथ बटाने के लिए माँ कपडे सिला करती थी। एक समय ऐसा भी आया जब उस लड़के को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। उस लड़के ने पर हार नहीं मानी और सपने देखे। उसने अपने सपनो को पाने के लिए संघर्ष किया और आखिरकार अपने सपने को सच करके ही माना।

सचिन जिंदल की परवरिश पूर्व दिल्ली के जनता फ्लैट्स में एक कमरे के मकान में दो भाई बहनो के साथ हुई थी। एक साधारण से सरकारी स्कूल में उन्होंने अपनी पढ़ाई करी। सचिन पे पिता ट्रक के सामान को भरते और उतरने का काम करते थे। उससे उनके घर का खर्च नहीं चलता था तो उनकी माँ लोगो के कपडे सिला करती थी। और इस तरह आर्थिक तंगी में उनका बचपन निकला।

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पैसे न होने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी और उनके पिता ने सचिन को उसके मां के साथ काम पर लगाने का सोचा। सचिन के मां की दिल्ली और उत्तर प्रदेश सीमा पर चाय की दूकान थी जहा ट्रकवाले आकर चाय पिया करते थे। सचिन वह पर ट्रकवालो के झूठे बर्तन उठाते और धोते थे। सचिन अंदर ही अंदर घुटने लगा और धीरे धीरे अकेले रहने लगे। उन्होंने ठान लिया था की वह यह ज़िन्दगी बदल कर रहेंगे। उन्होंने अपने बड़े भाई और दोस्तों की मदद से कंप्यूटर सीखना शुरू किया।

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उन्होंने कंप्यूटर टाइपिंग सीखी और उनकी पहली कमाई थी सौ रूपए की। फिर उन्होंने लोगो को घर जा जा कर कंप्यूटर सीखना शुरू किया और फिर जितना पैसा आया वोह उन्होंने ट्रेनिंग सेमिनार में जाने के लिए लगाया और उसका उन्हें फायदा भी मिला। जब वह बीस साल के थे तब उन्हें अपना पहला सेमिनार देने का मौका मिला।

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अपने पहले सेमिनार में वह डर गए और कुछ बोल नहीं पाए। उस रात वह सोच में पड़ गए की या तो वह ऐसे अपने सपने को छोड़ दे या फिर मैं हौसला रक्खु, इसका सापना करू और आगे बढ़ूँ। उसके बाद उन्होंने कई बार अकेले मेहनत करी उसके बाद उन्हें नॉएडा में एक कंपनी में काम मिला । लेकिन वह उससे खुश नहीं थे इसीलिए उन्होंने काम छोड़ दिया। उनके घरवालों ने बहुत बोलै लेकिन उन्हें पता था कि वह अब क्या करेंगे। उसके बाद वह मुंबई चले गए और वह कपड़ो के कमरे में अपने चाचा के साथ रह रहे थे। लेकिन सचिन ने यह तह कर लिया था कि वह अब गरीब नहीं रहेंगे तो उन्होंने खूब मेहनत करी और एक अच्छे व्यक्तः बनने के लिए पूरी मेहनत करी।

कुछ समय बाद उन्हें कंपनी से बेस्ट ट्रेनर का अवार्ड भी मिला। उसके बाद जितने भी बिज़नेस ट्रेनिंग के कॅरियक्रम होते थे उधर सचिन जिंदल को ही भेजा जाने लगा। वह अब ब्रांच ट्रेनिंग मैनेजर बन चुके थे। पांच साल कि नौकरी के बाद वह यह समझ चुके थे कि नौकरी से वह सिर्फ ज़रूरते पूरी कर सकते है अमीर नहीं बन सकते। इसीलिए उन्होंने अपना बिज़नेस खोला और उसे सफल करने में जुट गए कुछ समय असफल होने के बाद उन्हें आखिरकार सफता हासिल हुई।

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