यू.पी. : गवां बैठी अपने दोनों हाथ और एक पैर, पर नहीं मानी हार, करती हैं चित्रकारी, झोली में दाल चुकी हैं तमाम उपलब्धियां

ये बात तो हम सभी जानते हैं, की आजकल चल रहे टोक्यो पैरालिम्पिक्स में दिव्यांग खिलाड़ी कैसे जमकर प्रदर्शन कर रहे हैं और देश का सीना गर्व से चौड़ा कर रहे हैं| ऐसे ही कहानी है प्रयागराज की सरिता की, जिन्होंने चार वर्ष की आयु में ही एक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ और एक पैर गँवा दिए, लेकिन अपनी इस कमी की वजह से उन्होंने अपनेआप को अपाहिज नहीं बनाया, बल्कि सिर्फ एक पैर बचने के बाद उन्होंने उसे ही अपनी ताकत बना लिया, और आज उस पैर से चित्रकारी कर के उन्होंने बहुत सी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं|

दोनों हाथ और एक पैर गवां कर भी नहीं मानी हार, कर चुकी हैं अपने नाम कई पुरस्कार

प्रयागराज की सरिता उस वक़्त सिर्फ चार वर्ष की थीं, जब हाईटेंशन तार में बुरी तरह से झुलसने के बाद उन्होंने अपने दोनों हाथ और एक पैर गँवा दिया| कई सर्जरी हुई फिर सरिता की जान बच पायी| इस हादसे में सरिता ने मौत को भी मात दे दी| सरिता बताती हैं की, ‘मेरे माता-पिता ने उम्मीद व हौसलों के रंग मेरी जिंदगी में भरे। मां ने मुझे एक सामान्य बच्चे की तरह ही पाला तथा हमेशा आत्मनिर्भर होने की प्रेरणा दी। पिता सेना के उन वीरों की कहानियां सुनाते थे जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने धैर्य व हिम्मत को बनाए रखा।’

जानिये अब तक किन किन पुरस्कार से हो चुकी हैं सरिता सम्मानित

अपने माता पिता द्वारा दी गयी हिम्मत की वजह से ही सरिता ने अपनी ज़िन्दगी को एक नया मुकाम दिया| पढ़ाई के साथ साथ वह अपने चित्रकारी के हुनर को भी निखारती रहीं| मुंह में ब्रश को दबाकर दाहिने पैर की अंगुलियों के सहारे कैनवास पर जब रंग भरना शुरू किया, तो उनकी झोली में खूब उपलब्धियां आयी| पढ़ाई पूरी करने के बाद सरिता ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएफए की डिग्री हासिल की|

अपने नाम पर कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार अर्जित कर चुकी सरिता को महज़ 16 वर्ष की उम्र में ही 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय पुरस्कार ‘बालश्री’ से नवाजा था। वर्ष 2008 में उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने इंपावरमेंट ऑफ पर्सन विद डिसेबिलिटीज अवार्ड से सरिता को नवाजा। फिर वर्ष 2009 में मिनिस्ट्री आफ इजिप्ट ने इंटरनेशनल अवॉर्ड तथा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला तथा देश की पहली महिला जस्टिस लीला सेठ ने सरिता को गॉडफे फिलिप्स नेशनल ब्रेवरी अवार्ड से सम्मानित किया|

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