खुद शहीद होकर बचाई नौजवानों की जान!

जम्मू और कश्मीर कॉप मुदासिर अहमद शेख के पिता ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए आंखें नम करने वाली बात कही है. क्या होगी उस पिता की हालात जिसने अपने बेटे को सुपुर्द-ए-खाक करना पड़े. अपने ग़म को दबाकर मकसूद शेख ने कहा, ‘कहते हैं इसकी वजह से 1000 आदमियों की जान बच गई. मुझे बहुत खुशी है. कुर्बानी से 1000 आदमी की जान बच गई. बहुत फ़क्र है, पूरी बिरादरी फ़क्र कर रही है. जान दे दी इसने, अब वापस नहीं आएगा. हमें फ़क्र है लड़ते-लड़ते जान दे दी इसने.’मकसूद अहमद शेख ने बताया कि मुदासिर से उनकी आखिरी बार बात, शहादत से तीन दिन पहले हुई थी.

अपने बेटे को किया याद!

बीते बुधवार को मुदासिर की जम्मू कश्मीर की क्रिरी में एक एनकाउंटर के दौरान वतन पर कुर्बान हो गए. उरी के मुदासिर को उनके पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया. उत्तरी कश्मीर के डिप्टी आईजी, उदय भास्कर बिल्ला; बारामूला के सीनियर सुप्रिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस, रायीस मुहम्मद; उरी के एसडीएम, हरविंदर सिंह समेत सैंकड़ों लोगों ने मुदासिर को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि जहां पुलिस बल को नुकसान हुआ, वहीं तीन आतंकवादियों को मार गिराना एक बड़ी सफलता थी। ‘तीन आतंकवादी श्रीनगर आ सकते थे और हमले की योजना बना सकते थे।’ उन्होंने कहा कि आतंकवादी गुलमर्ग के पहाड़ी इलाकों में पिछले तीन से चार महीने से सक्रिय थे।

आतंकवादियों को किया था ढेर!

उन्होंने कहा, ‘हम उन्हें नियमित रूप से ट्रैक कर रहे थे।’ कुमार ने बताया कि इस साल अब तक सुरक्षा बलों के साथ विभिन्न मुठभेड़ों में 22 पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए हैं।झेलम किनारे स्थित बारामुला पुलिस लाइन में गमगीन माहौल के बीच तिरंगे में मुदासिर अहमद शेख का पार्थिव शरीर पहुंचा तो अहमद शेख बेटे को आखिरी नमन करने आगे बढ़े। उनके आंखों से आंसू बह रहे थे। वह ताबूत से लिपट गए। फिर उठे और आंसुओं को पोंछ फक्र से सीना चौड़ा कर पास खड़े जवानों से कहा, आंसू न बहाओ, मेरा बेटा शहीद हुआ है, उसने हजारों जिंदगियां बचाई हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पता था मेरा बेटा वापस नहीं आएगा, लेकिन मुझे उसपर गर्व है।

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