उत्तर प्रदेश के एक साधारण परचून दूकानदार के बेटे को मिली ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी से 1.5 करोड़ की स्कॉलरशिप

आज हम आपको बताने जा रहे हैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव बिल्हौर के निवासी आकाश अवस्थी की कहानी, जिनके कुछ कर दिखने के सपनों के आगे उनकी परेशानियों ने भी घुटने तक दिए और उन्होंने बुलंदियां हासिल कर ली| बचपन से ही हर चीज़ में होशियार अक्ष ने हॉस्टन यूनिवर्सिटी से डेढ़ करोड़ रूपये की स्कालरशिप प्राप्त कर ली है, और वे अब अमेरिका के लिए रवाना होंगे| उनके परिवार के लिए ये बहुत बड़ी ख़ुशी का लम्हा है|

बिल्हौर के इस साधारण से दूकानदार के बेटे ने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जिससे उनका सिर गर्व से उठ गया है| इस इंजीनियर बेटे आकाश अवस्थी ने इतनी बड़ी छलांग लगाई है की पूरा परिवार और गांव उस पर फक्र कर रहा है, वा उसे ढेरों ढेरों आशीर्वाद दे रहे है। अमेरिका की हॉस्टन यूनिवर्सिटी की डेढ़ करोड़ की स्कॉलरशिप पाकर आकाश ने एक मिसाल कायम कर दी है।

बिलौर के आकाश ने ली बड़ी उपलब्धि, मिली हॉस्टन यूनिवर्सिटी में डेढ़ करोड़ की स्कालरशिप

आपको बता दें की अमेरिका की हॉस्टन यूनिवर्सिटी में आकाश का चयन पांच साल के लिए पीएचडी प्रोग्राम में हुआ है। और अब वे उस प्रसिद्द यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस पर शोध करेंगे। आकाश ने मार्च 2021 में हॉस्टन यूनिवर्सिटी की ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा दी थी, जिसमे कई इंटरव्यू, लिखित परीक्षा के बाद उनका चयन इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग के कंप्यूटर साइंस के पीएचडी प्रोग्राम के लिए हुआ है। रिसर्च के दौरान आकाश थियोरेटिकल कंप्यूटर साइंस, कंप्यूटर डाटा यूजेस और भविष्य में कंप्यूटर में होने वाले नए-नए बदलावों पर रिसर्च करेंगे। उन्होंने बताया की यूनिवर्सिटी उन पर प्रति वर्ष 39,672 यूएस डॉलर खर्च करेगी, जिसमे वहां रहना, पठन-पाठन करना और अन्य चीजें शामिल हैं। उन्हें कुछ कैश भी दिया जायेगा|

ग्रेजुएशन के दौरान भी किया था आकाश ने टॉप

अपनी ग्रेजुएशन के लिए आईआईटी कानपुर में दाखिला न हो पाने के कारण आकाश ने तमिलनाडु कलासिलगम विश्वविद्यालय में बीटेक कंप्यूटर साइंस में एडमिशन लिया और टॉप कर गोल्ड मेडल हासिल किया। क्योंकि आकाश यूनिवर्सिटी के टोपर थे इसीलिए उन्हें यूनिवर्सिटी की ओर से ही भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर मुंबई भेजा गया, वा वहां उन्होंने करीब छह माह तक सुपर कंप्यूटर पर काम किया, यही नहीं बल्कि आईआईटी कानपुर, आईआईटी गांधी नगर में भी कंप्यूटर एनालिसिस के कई प्रोजेक्ट पर आकाश ने काम किया है। इसके बाद उन्हें अमेरिकन कंपनी ग्रेट लर्निंग डाटा बैंक में सालाना 20 लाख रुपये के पैकेज पर नौकरी मिली।

और आज उन्होंने इतनी बड़ी छलांग लगा दी की अमेरिका की हॉस्टन यूनिवर्सिटी में उन्होंने स्कालरशिप मिल गयी है, उनके पिता उनकी उपलब्धि से बहुत खुश हैं, उनके दादा ने बताया की उनके परिवार में आजतक कोई अमेरिका नहीं गया|

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