जानें उत्तर प्रदेश के ऐसे गांव की कहानी जो पैदा करता है IAS और IPS अफसर

आज हम आपको बताने जा रहे हैं उत्तर प्रदेश के एक ऐसे गांव की कहानी जिसने आज तक कई IAS और IPS अफसर पैदा किये हैं| ये गांव उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर है, और आश्चर्य की बात यह है की यह कोई कोचिंग संसथान नहीं है, बल्कि यहां से इन बड़े पदों पर निकला हर अधिकारी अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के बलबूते पर इस पद पर पहुंचा है|

उत्तर प्रदेश के इस अनोखे गांव से बन चुके हैं अब तक 47 लोग अधिकारी

हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के माधोपट्टी गांव की जहां के हर घर से करीब एक इंसान आपको ऐसा मिलेगा जो IAS या IPS के पद पर बैठा है, और इतना ही नहीं यह के कई लोग बड़ी बड़ी संस्थाओं के साथ भी काम कर रहे हैं जैसे इसरो, मनीला और इंटरनेशनल बैंक और ये सभी बखूबी यहां अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सबको आश्चर्य में डाल रहे हैं|

आइये बताते हैं आपको बड़े बड़े अफसर पैदा करने वाले माधोपट्टी गांव की कहानी

आपको बता दें की इस गांव ने सबसे पहला IAS अफसर सन 1914 में दिया था| गांव के सबसे पहले IAS अधिकारी मुस्तफा हुसैन, मशहूर कवि वामिक जौनपुरी के पिता थे| इनके बाद 1951 में इंदु प्रकाश थे जिन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल की और IFS अफसर बने| उन्ही के भाई विद्या प्रकाश सिंह 1953 में IAS अफसर के पद पर नियुक्त किये गए|

इस गांव के एक ही घर के चार भाइयों ने भी इतिहास रचा| 1955 में घर के बड़े बेटे विनय ने देश के इस सबसे कृतिम प्रतियोगी परीक्षा में 13वां स्थान प्राप्त किया और वे बिहार के मुख्य सचिव होकर रिटायर हुए| उनके दोनों भाई छत्रपाल सिंह और अजय कुमार सिंह ने 1964 में ये परीक्षा पास की और इसके बाद इन्हीं के सबसे छोटे भाई शशिकांत सिंह ने 1968 में यूपीएससी परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया|

आपको बता दे की इस गांव के दूर दूर तक कोई कोचिंग संस्थान नहीं है, फिर भी इस गांव के युवा और कड़ी मेहनत के बलबुलटे पर बड़े पदों में अधिकारी हैं और इन पदों को पाने के लिए ये शुरू से ही मेहनत करने लग जाते हैं और बुलंदियां हासिल करते हैं| इस गांव के युवा मिसाल हैं की कैसे बिना सुख सुविधाओं के भी आप आसमान की बुलंदियां हासिल कर सकते हैं, बस दृढ़ संकल्प होना चाहिए|

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