अपने पूरे घर के उपकरण चलाते है सूर्य ऊर्जा पर सुरेश, चार साल में एक मिनट भी नहीं गयी लाइट

अपनी दुनिया के पर्यावरण को साफ़ और सुरक्षित रखना हम सभी लोगो का धर्म है। हम लोगो की एक छोटी सी कोशिश भी.हमारे पर्यावरण को बचा सकती है। दोस्तों आज हम आपको एक ऐसे इंसान के बारे में बताएँगे जिसने एक ऐसे घर को बनाया है जो हवा, पानी, भोजन और गैस सभी ज़रूरी चीज़ो की पूर्ती करता है।


डी सुरेश चेन्नई के किलपॉक नई १७ वसु स्ट्रीट के रहने वाले है और उनकी उम्र 71 वर्ष है। सुरेश ने अपनी ज़िन्दगी में MD CEO और कई महत्वपूर्ण पदों पर टेक्सटाइल कंपनियों में काम किया है। उन्हें इस आविष्कार की वजह से उन्हें आज लोग सोलर सुरेश के नाम से जानते है। सुरेश ने बिओगास का सातपूर्वक इस्तेमाल करना सीख लिया है और यह बात लोगो को भी बताई है की बायो गैस से अगर बदबू आती है तो उसका कारन उसमे डाले जाने वाले पके और बिन पके ख़राब भोजन, फल और सब्जिओ के छिलके होते है।

उन्होंने यह भी बताया की इस्तेमाल के लिए इसमें निम्बू, संतरा, प्याज और अण्डे के चिक्कट जैसी चीज़े नहीं डालनी चाहिए। डी सुरेश के मन में यह ख़याल करीब 20 साल पहले आ गया था। सुरेश ने जब गर्मान्य की यात्रा के दौरान वह पर सौर्य ऊर्जा सयंत्र देखे थे जबकि जर्मनी में कम धुप निकलती है। तो उन्होंने सोचा की अगर यहाँ मुमकिन है तो भारत में क्यों नहीं।


सुरेश ने इस ज्ञान को लेकर सूर्य ऊर्जा को लेकर बिजली उत्पादन के लिए लोगो को प्रेरित किया। उन्होंने यह भी बताया की उनके लिए सबसे कठिनाई वाला काम था सूर्य ऊर्जा का इन्वेटर का इस्तेमाल करना। डी सुरेश ने टाटा बीपी सोलर, सु कॉम और कई बड़ी बड़ी नामी कंपनी के प्रोजेक्ट्स को भी मना कर दिया था। उन्होंने अपना खुद का सूर्य ऊर्जा यन्त्र बनाने के लिए काफी कड़ी मेहनत करी थी। सुरेश ने जनवरी 2012 में 1 किलोवाट का संयंत्र बनाया था और घर की छत से सूर्य ऊर्जा उत्पन्न करना शुरू करदिया था।

अपने काम की सफलता देख सुरेश काफी खुश थे और उन्होंने 2015 में अपने सूर्य ऊर्जा को 3 किलोवाट तक बड़ा लिया। अब वह सूर्य ऊर्जा की मदद से 25 लाइट्स, 11 पंखे और दो कंप्यूटर, 1 फ्रिज और भी कई उपकरण उपयोग कर सकते है। सुरेश ने सूर्य ऊर्जा की मदद से अपने घर में एक मिनट भी बिजली गुल होने नहीं दी जबकि उन्हें इलाके में हमेशा बिजली गायब रहती थी।

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