अपनी बेटी की जिद्द के आगे हार गए पिता ये मुस्लिम लड़की ने अपना प्यार पाने के लिए 8000 किलोमीटर दूरी तय कर हिन्दुस्तान पहुंची देखे इनकी तस्वीर जिसके प्यार में पागल हुई

मोरक्को की मुस्लिम युवती फादवा लैमाली ने प्यार के लिए अपना मुल्क छोड़ दिया और ग्वालियर के अविनाश दोहरे से शादी रचा ली ये अपने प्यार को पाने के लिए धर्म ,जाति और अपने मुल्क तक को छोड़ आयी . तीन साल पहले दोनों की दोस्ती सोशल मीडिया के जरिये हुई थी. हालांकि के मजबह अलग थे लेकिन फादवा और अविनाश ने एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा. अपने प्यार को सही साबित करने के लिए फादवा ने तीन साल मेहनत की. अविनाश दो बार मोरक्को भी गया. लैमाली के पिता ने अविनाश से भारत छोड़ने मोरक्को में सैटल होने की बात कही. फिर अविनाश ने फादवा के पिता को भरोसा दिलाया कि ना तो वो अपना देश और धर्म छोड़ेगा और ना ही फादवा पर कभी धर्म परिवर्तन का दबाव बनाएगा. वह जैसे मोरक्को में थी, भारत में भी वैसे ही आजाद रहेगी. अविनाश की बात पर जब फादवा के परिवार को विश्वास हुआ, उन्होंने हां कर दी.

मोरक्को की मुस्लिम युवती फादवा लैमाली ने प्यार के लिए अपना मुल्क छोड़ दिया
मोरक्को की मुस्लिम युवती फादवा लैमाली ने प्यार के लिए अपना मुल्क छोड़ दिया

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मोरक्को की मुस्लिम युवती फादवा लैमाली ने प्यार के लिए अपना मुल्क छोड़ दिया

ग्वालियर के अविनाश दोहरे से शादी रचा ली ये अपने प्यार को पाने के लिए धर्म ,जाति और अपने मुल्क तक को छोड़ आयी .मजबह, मुल्क और जुबान प्यार को कभी रोक नहीं सकती. मोरक्को की फादवा लैमाली ने सच कर दिखाया है.

मजबह, मुल्क और जुबान प्यार को कभी रोक नहीं सकती. मोरक्को की फादवा लैमाली ने सच कर दिखाया है.
मजबह, मुल्क और जुबान प्यार को कभी रोक नहीं सकती. मोरक्को की फादवा लैमाली ने सच कर दिखाया है.

फादवा को मध्य प्रदेश के ग्वालियर के अविनाश दोहरे प्यार हो गया. तीन साल पहले दोनों की दोस्ती सोशल मीडिया के जरिए उसकी पहचान अविनाश से हुई. दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. ‘हां’ बोलने से पहले फादवा ने अविनाश को अच्छी तरह परखा. फिर दोनों को अपने रिश्ते के एक नाम देनी की ठान ली.

पिता की रजामंदी के बाद फादवा करीब 4 महीने पहले भारत आ गई.
पिता की रजामंदी के बाद फादवा करीब 4 महीने पहले भारत आ गई.

  मोहब्बत में 8000 किलोमीटर भी कम पड़ गया

कहां अफ्रीकी देश मोरक्को और कहां भारत, लेकिन एक लड़की की मोहब्बत में 8000 किलोमीटर भी कम पड़ गया. फादवा और अविनाश की मुलाकात इंस्टाग्राम पर हुई थी. फादवा अंग्रेजी मिक्स अरबी बोलती थी. अविनाश को कंसेल्टेंसी में काम करने का फायदा हुआ और वह उसकी जुबान समझ गया. फिर दोनों में दोस्ती हो गई. फिर फादवा भारत और उसकी संस्कृति के बारे में जानने-समझने लगी. एक दूसरे को जानने-परखने के बाद शादी का फैसला लिया और इस पर कायम रहे.

तीन साल पहले दोनों की दोस्ती सोशल मीडिया के जरिए उसकी पहचान अविनाश से हुई.
तीन साल पहले दोनों की दोस्ती सोशल मीडिया के जरिए उसकी पहचान अविनाश से हुई.

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फादवा लैमाली की जिद्द के आगे परिवार भी झुक गया.

मगर जैसे ही परिवारों को उनके शादी के फैसले के बारे में पता चला, हंगामा खड़ा हो गया. मगर फादवा और अविनाश ने एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा.अपने प्यार को सही साबित करने के लिए फादवा ने तीन साल मेहनत की.

फादवा लैमाली की जिद्द के आगे परिवार भी झुक गया. 
फादवा लैमाली की जिद्द के आगे परिवार भी झुक गया. 

परिवार को हर जायज तरीके से समझाया. बेटी की जिद्द के आगे परिवार भी झुक गया. पिता की रजामंदी के बाद फादवा करीब 4 महीने पहले भारत आ गई. यहां भी उसकी परेशानियां कम नहीं हुई. उसने कानूनी पेचीदगियों का सामना किया और प्यार की जंग फतह की.