जानें दृष्टिहीन होने के बावजूद यूपीएससी परीक्षा पास करने वाली पूर्णा सुनथारी की प्रेरक कहानी

तमिलनाडु के मदुरै की रहने वाली पूर्णा संत्री उस वक़्त सिर्फ 5 साल की थी, जब उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी लेकिन उन्होंने कभी भी इस कमजोरी को अपनी सफलता में बाधा नहीं बनने दिया। अपने सफर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन हर बार उनके माता-पिता और दोस्त उनके साथ मज़बूती से खड़े रहे। पूर्णा ने अपने अथक प्रयासों और परिवार के सदस्यों की मदद से यूपीएससी परीक्षा में 286 रैंक हासिल की।

बचपन में ही खो दी आँखों की रौशनी, आज हैं पूर्णा एक आईएएस अधिकारी

पूर्णा एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता मार्केटिंग के क्षेत्र में सेल्स एग्जीक्यूटिव हैं और उनकी मां गृहणी हैं। पूर्णा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मदुरै पिल्लईमार संगम हायर सेकेंडरी स्कूल से की। पूर्णा बचपन से ही पढ़ने में तेज थी और वह बोर्ड परीक्षा में अपने स्कूल की टॉपर भी रही है। इसके बाद उन्होंने मदुरै के फातिमा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की डिग्री हासिल की।

माता पिता और दोस्तों ने की पूर्णा की बहुत मदद

वह यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही थी, जब साल 2018 में उन्होंने तमिलनाडु ग्राम बैंक में क्लर्क के तौर पर काम करना शुरू किया। नौकरी के साथ-साथ, वह यूपीएससी की तैयारी भी कर रही थी और फिर अपने पांचवें प्रयास में परीक्षा पास कर ली। पूर्णा का कहना है कि उन्होंने 11वीं कक्षा से ही आईएएस अधिकारी बनने का मन बना लिया था। वह एक आईएएस अधिकारी बनना चाहती थी और महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करना चाहती थी।

पूर्णा के माता-पिता दिन-रात किताबें पढ़ते थे जब यूपीएससी की तैयारी के लिए ऑडियो प्रारूप में कुछ अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं थी। साथ ही उनके दोस्तों ने कुछ किताबों को ऑडियो फॉर्मेट में बदलने में मदद की। पूर्णा अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और दोस्तों को देती हैं जिन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए उनके साथ दिन-रात काम किया है। पूर्णा कहती हैं कि परिवार और दोस्तों के सहयोग के अलावा आपको खुद पर भरोसा होना चाहिए। अगर आप खुद को आश्वस्त नहीं कर पा रहे हैं तो आप सफल नहीं हो सकते।

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