जीवन में आर्थिक तंगी के बावजूद भी बनाई “3000 करोड़” की कंपनी ,लेकिन बचपन में करा करते थे?

जीवन में हर एक व्यक्ति का सपना होता है कि वह बड़े होकर एक अमीर व्यक्ति बने और उसे पूरा करने के लिए वह हर एक प्रयास करता है जो कि उससे हो पाता है। अपने सपने को पूरा करने के लिए वह जी जान लगा देता है लेकिन कभी-कभी घर की मजबूरी और जिम्मेदारियां उसे पीछे हटा लेते हैं लेकिन कुछ लोगों के दिमाग से फिर भी वह बात नहीं हटती और वह अपने बिजनेस की ओर आगे बढ़ने लगते हैं लेकिन असल में सफलताएं भी इसी प्रकार के लोगों को मिलती हैं।

आज दोस्तों हम आप सभी लोगों को एक ऐसे गरीब सक्स की कहानी सुनाने वाले हैं जिन्होंने अपनी गरीबी से जूझते हुए अपने इस कारोबार को शुरू करा और आज करोड़ों के मालिक बन बैठे हैं। उन्होंने शुरुआत में सोचा कि उन्होंने सोचा कि ऐसी क्या चीज है जो कि कभी खत्म नहीं हो सकती और लोगों को हर समय उसका स्वाद लेने में आनंद आए। इसके साथ ही साथ उनका सोचना था। कि इसमें किसी जाति धर्म विशेष के बारे में बात नहीं करी जाए और यहां सब काम उन सभी बातों से परे हो।

आखिर किस तरह से अपने को करा हकीकत में तब्दील

हम आपको बताते हैं कि आखिर किस प्रकार से उन्होंने इस आईडी को विकसित करा और आखिर इसके पीछे का पूरा कहानी क्या थी। अपने आइडिया को सुचारु करते हुए उन्होंने साल 1984 में मुंबई में चार कर्मचारी की मदद से स्ट्रॉबेरी, आम और सेब जैसे स्वाद वाली 10 आइसक्रीम की शुरुआत की और इनका व्यवसाय (Business) शुरू कर दिया। लोगों ने उनके आइसक्रीम को काफी पसंद किया। इससे वे बहुत मोटीवेट हुए।

केवल 15 साल की उम्र में लिया इतना बड़ा फैसला

उन्होंने केवल 15 साल की उम्र में है निर्णय ले लिया था कि वह अपनी पढ़ाई लिखाई से अलग हटकर में जीवन में कुछ करना चाहते हैं जिसके लिए वह मुंबई चले गए वहां पर उन्होंने एक रिश्तेदार के भोजनालय में काम करना शुरू कर दिया और अपना कुछ समय नहीं बताया। उसके बाद उन्होंने मुंबई के जुहू के एक 12 बाई 12 फुट के छोटे से कमरे में जीवन व्यतीत करना शुरू कर दिया। वहां पर इतना कम इस पर मैं ज्यादा लोग होने के चलते उन्हें खाट के नीचे सोना पड़ता था। लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी मजबूरी को अपने जीवन की कामयाबी के आड़े नहीं आने दिया।

जब उन्होंने अपने दिमाग पर बहुत ज्यादा जोर डाला तो उसके बाद उनको आईडी आया कि ,वह आइसक्रीम की दुकान पर काम कर सकते हैं। क्योंकि उन्होंने सोचा कि अगर आइसक्रीम में फलों का स्वाद हो सकता है। तो इसमें असली फल से ही आइसक्रीम क्यों ना बनाई जाए और उन्होंने अपने कैरियर पर काम करना शुरू कर दिया जो कि भविष्य में बंद कर उनके लिए एक मिलियन डॉलर कंपनी बन गया।

+